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VIDEO नक्सलवाद के खात्मे के श्रेय पर सियासत, भूपेश बघेल और सीएम साय आमने-सामने


रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली बड़ी सफलता के बीच अब इसके श्रेय को लेकर सियासत तेज हो गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस अपनी सरकार के दौरान चलाए गए सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों को नक्सलवाद के कमजोर होने की बड़ी वजह बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई भाजपा सरकारों ने लड़ी और वर्तमान सरकार उसे अंतिम मुकाम तक पहुंचा रही है।


पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में करीब 600 गांव नक्सल प्रभाव से मुक्त कराए गए। अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, जिससे सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ी। उन्होंने कहा कि बस्तर में रोजगार, लघु वनोपज की बेहतर व्यवस्था, किसानों की ऋण माफी, तेंदूपत्ता संग्रहण की बढ़ी हुई दर, स्कूल, अस्पताल और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आदिवासियों का विश्वास जीतने का प्रयास किया गया। उनका दावा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के अंत तक नक्सलियों का प्रभाव घटकर नारायणपुर, बीजापुर और अबूझमाड़ के सीमित इलाकों तक सिमट गया था।


वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने 15 वर्षों तक नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भी उसी दृढ़ता और सख्ती के साथ अभियान जारी रखा होता, तो प्रदेश में नक्सलवाद का खात्मा पहले ही हो गया होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और सुरक्षा बलों के साहस के चलते वर्तमान सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और प्रदेश जल्द ही पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त होगा।


नक्सलवाद के मुद्दे पर दोनों प्रमुख दलों के बीच शुरू हुई यह बयानबाजी अब राजनीतिक बहस का नया विषय बन गई है। एक ओर कांग्रेस अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रही है, तो दूसरी ओर भाजपा अंतिम सफलता का श्रेय अपनी सरकार और सुरक्षा बलों की रणनीति को दे रही है।

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