Advertisement Carousel

कागजों में चमचमाई स्मार्ट सिटी, ज़मीन पर धूल फांकती रही जनता: ₹1764 करोड़ डकार गए, पेनल्टी के नाम पर ‘सन्नाटा’

​कागजों पर 100% काम पूरा, पर केंद्र के पास न ऑडिट रिपोर्ट है न क्वालिटी का अता-पता; RTI में हुआ ‘स्मार्ट’ खेल का पर्दाफाश

​रायपुर
​शहर को ‘स्मार्ट’ बनाने का सपना दिखाकर जनता को गड्ढे, धूल और दूषित पानी का ऐसा तोहफा दिया गया है कि इतिहास याद रखेगा। केंद्र और राज्य के खजाने से ₹1,764 करोड़ की भारी-भरकम राशि कागजी फाइलों में पानी की तरह बहा दी गई, लेकिन जब सूचना के अधिकार (RTI) में पूछा गया कि “साहब, काम कैसा हुआ और रिपोर्ट कहां है?”, तो जवाब मिला—”हमारे पास कोई रिकॉर्ड ही नहीं है!”

​यह सनसनीखेज खुलासा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने आधिकारिक RTI दस्तावेजों के आधार पर किया है।

​ठेकेदारों पर ‘असीम कृपा’: पेनल्टी के नाम पर मिला ‘शून्य’ (Nil)

​सरकारी नियमों की मानें तो तय समय सीमा में काम पूरा न करने वाली एजेंसियों पर ‘लिक्विडेटेड डैमेजेस’ के तहत करोड़ों रुपये का जुर्माना ठोक दिया जाना चाहिए था। मगर यहां तो ठेकेदारों पर विभाग का ‘प्यार’ कुछ ज्यादा ही उमड़ पड़ा।
​साल 2018-19 का प्रोजेक्ट 2026 तक लटकता रहा, डेडलाइन बीतने के बाद भी काम अधूरा पड़ा रहा, लेकिन केंद्र सरकार के आरटीआई जवाब में पेनल्टी का आंकड़ा आया—’NIL’ यानी शून्य! यानी देर तुम करो, धूल जनता फांके और हम तुम्हें इनाम में बिना किसी जुर्माने के पूरी राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट थमा दें।

​कागजों में ‘स्मार्ट’, जमीनी हकीकत में ‘बदहाल’:

​प्रेस वार्ता में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार ‘स्मार्ट’ घपले की बानगी कुछ यूं है:

​24×7 प्रेशराइज्ड वाटर सप्लाई: मोतीबाग कमांड एरिया में मई 2022 तक शुद्ध पानी की पाइपलाइन बिछनी थी। हकीकत यह रही कि सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं और जनता को गंदा व दूषित पानी पीने के लिए विवश होना पड़ा।

​कुशालपुर-संतोषी नगर ड्रेनेज: मॉनसून से पहले पूरा होने वाला काम वर्षों अटका रहा और बस्तियां हर साल जलमग्न होती रहीं।

​बिलासपुर मंगला STP: 18 महीने का काम सालों बाद भी अधूरा रहा, जिसे खुद नगर निगम ने हाईकोर्ट में शपथ-पत्र देकर स्वीकारा।

​न थर्ड पार्टी ऑडिट, न इंस्पेक्शन… बस बिल पास!

​अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि बंद कमरों में बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी स्थलीय परीक्षण और बिना थर्ड-पार्टी ऑडिट रिपोर्ट के ही 100% भुगतान कर दिया गया। जब केंद्र से पूछा गया कि क्या कोई फिजिकल वेरिफिकेशन हुआ, तो उन्होंने साफ कह दिया कि उनके पास इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

​अब ‘हाईकोर्ट’ में नपेगी स्मार्ट फाइलों की धूल

​इस पूरे गोलमाल को लेकर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच ACB/EOW अथवा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने और दोषी अफसरों व ठेकेदारों पर तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!