झीरम घाटी हमले की चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे, लखमा के फोन और गोंडी बातचीत का भी जिक्र
रायपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले के 13 साल बाद सामने आए NIA कोर्ट के आदेश और जांच से जुड़े दस्तावेजों में हमले की साजिश और घटनाक्रम को लेकर कई अहम जानकारियां दर्ज हैं। कोर्ट के मुताबिक माओवादियों ने हमले की योजना पहले से तैयार की थी और वारदात से पहले हमले की रिहर्सल भी की गई थी। करीब 150 से 200 माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला किया था।
कोर्ट के रिकॉर्ड में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कवासी लखमा और वाहन चालक दशाराम से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख है। वाहन चालक दशाराम की गवाही के अनुसार, लखमा हमले के दौरान लगातार आ रहे फोन कॉल पर गोंडी भाषा में बात कर रहे थे और बातचीत में बार-बार ’10-15′ का जिक्र कर रहे थे। नंदकुमार पटेल ने उन्हें हिंदी में बात कर इसका अर्थ बताने को कहा था, जिस पर गवाही के मुताबिक लखमा ने ‘डीजल-डीजल’ कहा। घटनास्थल पर भी लखमा और माओवादी नेता विनोद के बीच गोंडी में बातचीत का उल्लेख कोर्ट रिकॉर्ड में है।
रिकॉर्ड के मुताबिक लखमा शुरू में केशलूर जाने के लिए तैयार नहीं थे। बाद में नंदकुमार पटेल के कहने पर वे उनके साथ गए। माओवादियों ने पटेल और उनके बेटे दिनेश को बंधक बनाया और बाद में उनकी हत्या कर दी। लखमा और चालक दशाराम वहां से निकलकर दरभा पुलिस स्टेशन पहुंचे।
हालांकि, उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर इन परिस्थितियों को कवासी लखमा की नक्सली साजिश में संलिप्तता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। रिपोर्टों के अनुसार NIA की जांच में उनके खिलाफ साजिश का प्रमाण नहीं मिला था।
25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी और 38 लोग घायल हुए थे। मृतकों में महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, उदय मुदलियार और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल शामिल थे। मामले में 13 साल बाद NIA विशेष अदालत ने 10 माओवादियों को मृत्युदंड सुनाया है।
