2023-24 और 2024-25 में केंद्र से मिली राशि रही अनस्पेंट, 2025-26 के 993.40 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र भी नहीं भेजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में केंद्र से मिली 690.77 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं कर पाई। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी 993.40 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) भी केंद्र सरकार को प्रस्तुत नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अधिवक्ता एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने RTI से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर यह मामला उठाया है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के लिए 776.59 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें से 312.25 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। इसी तरह वर्ष 2024-25 में 830.65 करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन इसमें से 378.52 करोड़ रुपये की राशि अनस्पेंट रह गई। दोनों वर्षों को मिलाकर कुल 690.77 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए जा सके।
ठाकुर ने कहा कि एक ओर प्रदेश के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में स्कूल भवनों की स्थिति खराब है, शिक्षकों की कमी बनी हुई है और बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के विकास के लिए उपलब्ध करोड़ों रुपये खर्च नहीं हो पा रहे हैं। यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने वर्ष 2025-26 के उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, केंद्र से 993.40 करोड़ रुपये जारी होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा इसका उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाना गंभीर विषय है। इससे भविष्य में केंद्रीय अनुदान की अगली किस्त प्रभावित होने की आशंका भी है, जिसका नुकसान प्रदेश के लाखों स्कूली बच्चों को उठाना पड़ सकता है।
मनोज सिंह ठाकुर ने सरकार से सवाल किया कि जब स्कूलों में संसाधनों की कमी है, तब शिक्षा के लिए उपलब्ध राशि खर्च क्यों नहीं की गई? उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और बजट के उपयोग की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
