रायपुर। राजधानी स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक संगठन ने कार्यालय में हुए भुगतानों और वित्तीय लेनदेन की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में निजी दोपहिया वाहनों के ईंधन भुगतान, फोटोकॉपी के नाम पर लाखों रुपये के बिल और संविदा कर्मचारी को वेंडर बताकर उसके निजी बैंक खाते में भुगतान किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता संगठन का दावा है कि संबंधित दस्तावेजों के साथ शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने CMHO मिथिलेश चौधरी की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
चार साल के कार्यकाल का ऑडिट कराने की मांग
संगठन ने CMHO कार्यालय के पिछले चार वर्षों के वित्तीय लेनदेन की समीक्षा और स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है। इसके साथ ही सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में यह दावा भी किया गया है कि CMHO के राजनांदगांव में पदस्थ रहने के दौरान के एक मामले की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में जांच लंबित है। हालांकि, इन आरोपों और जांच की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
राज्यस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
संगठन ने पूरे मामले की राज्यस्तरीय जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और CMHO के स्थानांतरण की मांग की है। फिलहाल, लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष और विभागीय जांच की आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
