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ABCD से फिर अ अनार की ओर, बे-पटरी हुए आदिवासी होनहार बच्चों को पटरी पर लाने की योजना

रिपोर्ट / विजय शर्मा / 09424276400
00 सरकारी माडल स्कूल निजी हाथों में
00 दयानंद आंग्ल वैदिक संस्था दिल्ली के हाथों में ।

कोंडागांव / पिछले 5 वर्षो से जिले के विकास खंड फरसगांव कोंडागांव, माकड़ी, बड़ेराजपुर, और केशकाल में चल रहे पांच सरकारी स्कूलों को शासन ने निजी हाथों में सौंप दिया, इनमे पढ़ने वाले सैकड़ों आदिवासी छात्र आर्थिक रूप से कमजोर है मगर प्रतिभावन छात्रों का भविष्य अधर में दिखाई पड़ रहा है चुकी अब इन्हे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से सरकारी स्कूलों में सरकारी हिन्दी माध्यम के स्कूलों में जाना होगा और एबीसीडी छोड अब अ से अनार का ज्ञान प्राप्त करना होगा, जिससे पालक बालक दोनों असमझ में है।

ये थी योजना –
प्रदेश सरकार ने दुर-दराज के होनहार और आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभावना छात्रों को चिन्हांकित कर उन्हें सरकारी हिन्दी माध्यम स्कूलों से निकाल अंग्रेजी माध्यम के माडल स्कूल विकास खंड में बनाये थे जहां उन्हें अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा उपलब्ध करवाने की योजना थी मगर इन छात्रों को अब पुनः एबीसीडी छोड अ से अनार का ज्ञान प्राप्त करने सरकारी स्कूलों का रूख करना पड़ेगा पालक बालक दोनों असमझ में ।

ये सुविधाएं थी माडल में –
कोई शूल्क नहीं आवासीय विद्यालय में रहने खाने पाठ्य पुस्तकें गणवेष के साथ अच्छे शिक्षकों द्वारा उन्हें शिक्षा दी जा रही थी लंबे समय तक इन पालकों और छात्रों में व्यवस्था बदलने आंदोलन किया था । नतीजा रहा निरंक ।

भवन तैयार होते ही निजी हाथों में माॅडल स्कूल –
पिछले वर्षो से ये बच्चे जैसे तैसे सरकारी भवनों में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे और अपने लिये बनते माडल भवन देख खुश हो रहे थे भवन तैयार हुए और उन्हें शासन ने निजी हाथों में सौंपने का निर्णय ले लिया ।

अब एैसा होगा शुल्क –
अब सरकारी माॅडल स्कूलों की कमान डीएवी के हाथों दयान्नंद आंग्ल वैदिक संस्था दिल्ली को 9000 प्रवेश शुल्क 2000 प्रतिमाह शिक्षा शुल्क 7000 रूपए प्रतिवर्ष अन्य शुल्क गणवेष और पाठ्य पुस्तक भी स्वयं के खर्च पर लेनी होगी छात्र / छात्राओं को कुल मिलाकर आर्थिक रूप से कमजोर पालकों के लिये इस स्कूल में बच्चों को शिक्षा दिलाना सपना होगा ।

मोहन मरकाम विधायक –
भाजपा सरकार पूरी तरह शिक्षा का व्यवसायीकरण करने में लगी है । आदिवासी गरीब बच्चों के लिये माडल स्कूल का सपना दिखा केन्द्र से पैसे जारी करवा उन भव्य आलीशान इमारतों को निजी प्राईवेट कंपनीयों को शिक्षा का ठेका दे दिया है । ये कमजोर आदिवासी छात्रों के साथ घोर अन्याय है । मामले को हर स्तर पर कांग्रेस उठायेगी

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