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130 साल पुराने सेनेटोरियम अस्पताल की स्थिति, ब्लड टेस्ट एक्सरे मशीनें अनुपयोगी और पैसे उगाही करते कर्मचारी

रिपोर्ट / मुकेश विश्वकर्मा / 9981361600

पेंड्रा / बिलासपुर जिले का 130 साल पुराने सेनेटोरियम अस्पताल को प्रदेश के पुर्व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने 3 साल पहले एफआरयू फर्स्ट रिफरल यूनिट में अपग्रेड करने का शुभारंभ किया था और दावा था कि क्षेत्र के मरीजों को अब 130 किलोमीटर बिलासपुर जाने की बजाय यहीं समुचित चिकित्सा सुविधा मिल जाएगी पर आज भी यहां पर स्थिति कुछ ऐसी है कि यहां मरीजों का उपचार तक ठीक नहीं होता जबकि ब्लड टेस्ट एक्सरे आदि की मशीनें तक अनुपयोगी हो गयी है उलटा जो व्यवस्था यहां पर थी वह भी बंद हो गयी है ।

bb_00014बिलासपुर जिले के गौरेला ब्लॉक में स्थित सेनेटोरियम अस्पताल का इतीहास 130 साल पुराने होने के साथ ही साथ गौरवशाली भी रहा है पर इसके बावजूद इस अस्पताल की माली हालत शर्मसार करने वाली है। जिले के तीन आदिवासी विकासखंडों पेंड्रा गौरेला और मरवाही में मरीजों को उपचार के लिये बिलासपुर जाना पड़ता और हादसों के दौरान अथवा गंभीर अवस्था में मरीजों को बिलासपुर रिफर कर दिया जाता। ऐसे में डेढ़ सौ किलोमीटर दूर बिलासपुर पहुंचने के पहले कई बार मरीजों को जान तक गंवानी पड़ी जबकि कई बार लोग मरते – मरते बच जाते हैं। ऐसे में लोगों को सहूलियत देने के लिये सेनेटोरियम अस्पताल में कुछ साल पहले जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल हुआ करते थे तब उन्होने एफआरयू यानि फर्स्ट रिफरल यूनिट के रूप में इस अस्पताल को अपग्रेड करने का शुभारंभ किया पर वह भी सिर्फ कागजों तक में ही सिमटकर रह गयी और यहां मरीजों को ब्लड टेस्ट, एक्सरे और ठीकतरीके से प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता वहीं डॉक्टरों की और निजी लैब संचालकों की सांठगांठ के कारण मरीजों को जांच के साथ साथ दवांए तक बाहर से महंगे दामों में खरीदकर लाना पड़ता है वही सेनेटोरियम अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों पर पहले भी गंभीर आरोप लगते रहे है जिसमें मरीजों का उपचार न करना, दुर्व्यवहार और पैसों की वसूली करना और तो और अस्पताल में उपचार करने की बजाय अपने घरों में चलायी जा रही निजी क्लीनिक में उपचार कराने को मजबूर करना। फर्स्ट रिफरल यूनिट में अपग्रेड करने की पहल से पहले नेताओं ने तो खूब तालियां बटोरी और फीता काटकर चले गये पर इसके कोई यहां की हकीकत हालत झांकने की कोशिश तक नहीं किया और यही कारण है कि सेनेटोरियम अस्पताल और भी बदहाल हो गया और मरीजों को उपचार मिलने की बजाय उनका शोषण ज्यादा होने लगा। अब तो लोग इस अस्पताल को मौत का अस्पताल कहने लगे है क्योकि इस अस्पताल में कभी समय पर कोई भी चिकित्सक उपलबंध नही रहता और अगर कोई इमरजेसीं में मरीज और उनका परिजन यहां पहुचा तो पहले डॉक्टरों के घर जाकर उन्हे बुलाकर लाये जब कही अगर डॉक्टर आ गये तो ठीक वर्ना मरीज की जान पर बन आती है क्षेत्र में स्वास्थय व्यवस्था का हाल इतना बुरा है की अगर इलाज मिल गया तो बहुत बड़ी बात है वही पिछले दिनों मरवाही विधायक अमित जोगी ने भी इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की कोशिश की जहां पर लोगों के अनुसार कोटमी गांव के एक युवक को कंरेट लगने के चलते झुलस गया है उसे लेकर गांव के लोग सेनेटोरियम पहुचे पर सही समय पर उसे इलाज नही मिला और उसकी मौत हो गयी इसके बाद मरवाही विधायक अमित जोगी ने डॉक्टरों को जमकर फटकार लगायी लोगों को लगा इसके बाद तो स्थिति सुधरेगी पर कहा सेनेटोरियम समेत विधायक के खिलाफ ही मोर्चो खोल दिये और हड़ताल पर चले जाने की बात कही आखिरकार मामले में कुछ भी कार्यवाही नही हुयी। बिलासपुर जिले के आदिवासी विकासखंडो की यह हालत है तो बाकी जगह का अंदाज सहज ही लगाया जा सकता है। सेनेटोरिम अस्पताल के दिन आखिर कब फिरेंगे और आखिर कब इस इलाके की करीब 10 लाख की आबादी को यहां समुचित रूप से उपचार मिलना शुरू हो सकेगा इसका इंतजार हर कोई कर रहा है। बहरहाल बेहतर स्वास्थय व्यवस्था का दावा करने वाली रमन सरकार इस आदिवासी बाहूल्य इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिये आखिर कब सूध लेगी इसका इंताजार हर किसी को है।

वर्षो से जमें डॉक्टर – इस क्षेत्र के तीनों ब्लॉक में जितने डॉक्टर है अधिकत्तर यही के रहने वाले है यह भी एक बड़ा कारण है लचर और बदहाल स्वास्थ व्यवस्था है ।

पैसे उगाही करते है कर्मचारी – वही कुछ महिलाये जो प्रसव के लिये यहां पहुचती है उनका कहना है कि अगर यहां पर भगवान की दया से ठीक ठाक अच्छे से प्रसव हो जाये तो अस्पताल के कर्मचारी पैसे के लिये चढ़ाई कर देते है की लड़की हुआ है तो कही लड़का हुआ है ये अस्पताल कहने को हीसिर्फ मुफ्त का अस्पताल है पर हकीकत कुछ और ही है ।

14_00012मीनू के अनुसार अनुसार नहीं मिलता – प्रसुताओं को मिलने वाले भोजन कि बात की जाये जिसे नियमानुसार कोई महिला समुह चला सकती है पर यहां पर सालों से यही अस्पताल में पदस्थ कर्माचारी ही चला रहा है जिसकी शिकायत भी उच्च अधिकारियो से की गयी की इनके द्वारा मीनू के अनुसार ना ही भोजन दिया जाता ना ही नाश्ता पर आज तक इस मामले में कोई भी कार्यवाही नही हुयी।

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