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फर्जी KCC मामला, शिकायत के बाद भी ठंडे बस्ते पर जाँच, बैंक अधिकारियों और दलालों की सांठगांठ पर प्रशासन मेहरबान 

रिपोर्ट / मुकेश विश्वकर्मा / 9981361600

पेण्ड्रा / बिलासपुर जिले के पेंड्रा इलाके में बैकों के अधिकारियों और दलालों की सांठगांठ से किसान क्रेडिट कार्ड के नाम पर गरीब आदिवासियों के साथ फर्जीवाड़ा और ठगी के मामले में जांच अब ठंडे बस्ते में जाते दिखाई दे रहा है जबकि मामले में शिकायत के बाद तत्कालिक एसडीएम ने मामले को जांच में सही पाया था और जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौपने की बात कही थी। साथ ही साथ पीडितो ने अपने साथ हुई ठगी की शिकायत पेंड्रा थाने में दर्ज कराये थे और आज लंबे समय के बाद भी दोषियों पर प्रशासन मेहरबान है। 

                vlcsnap-2016-11-04-12h54m42s175-1दरअसल पेंड्रा गौरेला और मरवाही के आदिवासी क्षेत्र में बैंक दलाल और बैंको के अधिकारियो से साठंगांठ कर आदिवासियों के नाम पर केसीसी से फर्जी दस्तावेज के सहारे लाखों रूपये निकाल लिये गये थे जिसकी शिकायत क्षेत्र के पीडितों ने पेंड्रा थाने और एसडीएम पेंड्रारोड के पास भी किये थे मामले में तत्कालिक एसडीएम नम्रता गांधी ने गरीब आदिवासियों के साथ हुए फर्जीवाडा को अपने जाँच में सही पाया और मामले की जाँच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौपने की जानकारी दी थी पर आज कई माह गुजर जाने के बाद भी अमारु गांव के रहने वाले जिनकी नाम से पीडितो ने थाने में शिकायत की वो गांव में खुले आम घूम रहे है और पीडितो के भी डरा धमका रहे है अमारु गांव में रहने वाले जितेंद्र पांडे और रामदास काशीपुरी फर्जी kcc बनाने के मामले में मुख्य मास्टर माइंड है साथ ही पेंड्रा के बैंक दलाल भी इन लोगो के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज बनवाने में बराबर के दोषी है जिनके खिलाफ  किसी भी प्रकार की अबतक कोई कार्यवाही नहीं किया गया और मामला ठंडे बस्ते जाता दिखाई दे रहा है तो वहीं क्षेत्र में बैंक  दलाल एक बार फिर से केसीसी के आदिवासियों के नाम पर फर्जी kcc बनाने का गोरखधंधा शुरू कर दिए है और इनके निशाने में है क्षेत्र के गरीब कम पढ़े लिखे आदिवासी जिनके आगे पीछे कोई साथ देने वाला ना हो।

              वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि के माने तो यह पूरा मामला छोटा मामला नही है बल्कि केसीसी किसान क्रेडिट कार्ड फर्जीवाडा में क्षेत्र का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है जो बैंक अधिकारियो से मिलीभगत कर गरीब और आदिवासियों के फर्जी दस्तावेज के सहारे ठगी कर रहे है।और रशुखदार बैंक दलालो का लगातार बैंकों में आना जाना जारी है और अधिकारियों से मेलमिलाप भी कर रहें हैं जिसको यदि स्थानीय प्रशासन गंभीरता से लेकर जांच करे तो बैंकों में लगे सीसीटीवी के फुुटेज ही कार्यवाही हेतु काफी हो सकतें है। वही बैंक दलाल बैंको के आसपास से ही मडराते रहने है और अगर कोई सीधे बैंक पहुचकर अधिकारियो से kcc या अन्य किसी लोन की जानकारी मांगता है तो अधिकारी भी उन्हें दलालो से संपर्क करने को कहते है।

            वहीं पुलिस के उच्च अधिकारियो नरेंद्र बेताल की माने तो अमारु गांव के किसानो के साथ केसीसी बनवाने के मामले में पीडितों की शिकायत मिली थी जिसकी जांच जारी है और दोषियों पर जल्द ही कड़ी कार्यवाही की जाएगी और उन्होंने आमजन से अपील भी किया है कि इस प्रकार के ठगी के मामले पीडित बिना डरे थाने में शिकायत दर्ज करा सकतें हैं जिसकी निष्पिक्ष रूप से जांच कर दोषियों के खिलाफ कडी कार्यवाही की जायेगी।

              पहले भी कई बार kcc या अन्य किसी लोन के नाम पर कई लोगो ने शिकायत पुलिस या प्रशासन से की गई पर या तो दलाल या बैंक अधिकारी मामले में समझौता करा दिया जिससे दोषी बच जाते। वही बैंको से जुड़े लोगो की माने तो अगर kcc के प्रकरणों में लगे दस्तावेजो की जाँच गंभीरता से की जाए तो मुश्किल से 20 प्रतिशत ही दस्तावेज सही होंगे अन्यथा सभी फर्जी। दस्तावेजो के सहारे। दलालो के निशानों में रहते है ऐसे लोग जो पड़े लिखे ना हो उनके आगे पीछे कोई ऐसा शख्स ना हो जो उन्हें प्रशासन तक जाने का रास्ता ना दिखा दे। बैंक दलालो की चांदी kcc या अन्य कोई लोन दिलाने वाले दलाल या उनका साथी इनसे संपर्क कर इन्हे शासन से मुफ़्त में पैसा दिए जाने की योजना बतलाते है और राजी होने पर योजनबध तरीके से दस्तावेज तैयार भी कराते है।और बैंक लेजाकर kcc पास कराकर बैंक अधिकारियो से पर्सेंट के आधार पर kcc बनवाने का ठेका दे देते है और पैसा मिलने पर पीड़ित को हज़ार दो हजार या ज्यादा से ज्यादा 5000 हज़ार देकर सारा पैसा डकार लेते है। आसपास के गावो में सैकड़ो पीड़ित जिनके पास आज भी kcc का पैसा पटाने को बैंक का नोटिस पहुच रहा है वो लोन जो उन्होंने लिया ही नहीं।

              बहरहाल एक ओर पुलिस के उच्च अधिकारियों का कहना है कि ठगी के मामले में दोषियों के खिलाफ कडी कार्यवाही की जायेगी तो वहीं लंबे समय से पीडितों के द्वारा थाने में शिकायत ठंडे बस्ते में पडा हुआ है और कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति ही की जा रही है जिससे पुलिस और अधिकारियों पर सवालिया निशान लगा हुआ है।

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