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1.5 रुपये प्रतिदिन तिहाड़ी मजूदर था मैं – श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े, 01 मई मजदूर दिवस की दी शुभकामनाएं…

कोरिया / मजदूर दिवस(1 मई) पर अपना संदेश जारी करते हुए प्रदेश के श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने कहा की मैंने सन 1972 में चरचा कॉलरी में 1.5 रुपये प्रतिदिन तिहाड़ी मजूदर के रूप में कार्य किया है और हर तबके के मजदूरों का दर्द अच्छी तरह से जानता हूँ समझता हूं। 

….मजदूर दिवस पर सभी मजदूर साथियों को श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने दी शुभकामनाएं।
श्री राजवाड़े ने बताया कि कॉलरी की नॉकरी छोड़कर मैंने आज जिंदगी में तमाम विपरीत परिस्थितियों को पार करते हुए इस मुकाम को हासिल किया है, जिसमें मजदूर साथियों का भी मुझे पूरा सहयोग रहा है और आज जब भी मौका मिलता है वे मजदूरों का सहयोग करने में पीछे नही हटते। इसी का परिणाम है कि जांजगीर जिले के अनेक मजदूरों को मैंने मलेशिया से मुक्त कराया। इलाहाबाद में फंसे छत्तीसगढ़ के 50 मजदूरों को मुक्त कराया साथ ही कांगो में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी उसके मृत शरीर को मैंने अपने देश वापस लाने का काम किया है। श्री राजवाड़े ने कहा कि आज प्रदेश सरकार गरीब मजदूरों के हित मे अनेक कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है,हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम मजदूर वर्ग को योजनाओं का उचित लाभ दिलाने का काम करें। उन्होंने बताया कि पहले न्यूनतम मजदूरी 242 रुपये प्रतिदिन था जिसे बढ़ाकर 330 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार मजदूरों के भविष्य को लेकर भी चिंतित है उन्हें बैंक से भुगतान कराया जा रहा है उनका ईपीएफ भी कटेगा जो कि सीधे उनके बैंक खाते में जमा होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आने वाले दिनों में अनेक योजनाएं मजदूरों के हितों में लागू करेगी।

मजदूरों के लिय सरकार भी आई है आगे – छत्तीसगढ़ सरकार ने श्रमिकों की  सामाजिक-आर्थिक बेहतरी  के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरूआत की है। असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिकों के लिए दो महत्वपूर्ण संस्थाओं-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल और छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल का गठन किया गया है। भवन निर्माण के क्षेत्र में काम कर रहे लगभग 57 प्रकार के श्रमिकों के पंजीयन के साथ उनके लिए कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, जिनमें मुख्यमंत्री साईकिल, सिलाई मशीन तथा औजार सहायता योजना, गंभीर बीमारियों से पीड़ित श्रमिकों के लिए चिकित्सा सहायता योजना, उनकी विवाह योग्य बेटियों की शादी में मदद के लिए कन्या विवाह योजना, श्रमिक बच्चों को कक्षा पहली से पोस्ट ग्रेजुएट कक्षाओं तक पढ़ाई के लिए नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना आदि शामिल हैं। पत्थर तोड़ने वाले श्रमिक, राजमिस्त्री, बढ़ाई, पेंटर, रेजा-कुली, इलेक्ट्रिशियन आदि 57 प्रकार के श्रमिकों को इन योजनाओं का लाभ मिल सकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा 53 प्रकार के कामों में लगे श्रमिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। धोबी, दर्जी, माली, मोची, नाई, बुनकर, वनोपज श्रमिक, मछुवारे, अगरबत्ती बनाने वाले, हड्डी बिनने वाले, समाचार पत्र हॉकर, सिनेमा व्यवसाय में लगे लाईट मेन, स्पाट बॉय, कोटवार, सोना-चांदी की दुकानों में काम करने वाले कारीगर आदि इनमें शामिल हैं। उनके लिए भी चिकित्सा सहायता, साईकिल सहायता, कौशल उन्नयन आदि कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

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