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राज्योत्सव के विपरीत: भीख माॅग रहे मासूमों की ये कैसी मज़बूरी – विकास दावों के खुलती पोल

00 पीड़ित मानमती का दुख बांटने नहीं पहुॅचा कोई जनप्रतिनिधि
00 माता पिता की मौत के बाद दो बेटियां नहीं जा पा रही स्कूल
00 बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ अभियान बेमतलब
कोरिया / पूरा प्रदेश इधर राज्योत्सव मनाने में व्यस्त है उधर कोरिया जिले से झकझोरती हुई दो ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो हमें यह सोचने के लिए विवश कर रही हैं कि ऐसे हालातो में राज्योत्सव मनाना सार्थक कहा जा सकता है।

तस्वीर कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत परसगढ़ी है जहां सामाजिक बहिष्कार का दंश भोग रही एक महिला को अपने पति के साथ 6 दिन गुजारने पड़े और इन 6 दिनों में जब कोई भी ग्रामीण मृतक के अंतिम संस्कार के लिए सामने नहीं आया तब महिला को मजबूरन अपने सीने में पत्थर रखकर सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर घर की बाड़ी में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। वहीं दूसरी तस्वीर मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ही ग्राम पंचायत लालपुर की है जहां माता पिता की मौत के बाद दो बेटियों को अपने भाई के साथ पेट भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत परसगढ़ी में रहने वाली मानमती ने लगभग 25 वर्ष पूर्व मनेन्द्रगढ़ निवासी शिवनाथ से प्रेम विवाह किया था। महिला द्वारा दूसरा विवाह करने से गांव के लोगों ने मानमती व शिवनाथ का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। इस दौरान दोनों किसी प्रकार गांव में रहकर गुजर बसर कर रहे थे। बीते 26 अक्टूबर को शिवनाथ की घर में मौत हो गई। 6 दिनों तक शव घर में पड़ा रहा लेकिन गांव का कोई भी व्यक्ति अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आया। और तो और अभी तक न तो कोई जनप्रतिनिधि गांव में पहुॅचा और न तो कोई सामाजिक संस्था जिनके पदाधिकारी महिला सशक्तिकरण की बात करते नहीं थकते।

मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत लालपुर में रहने वाले सोना प्रसाद उर्फ सिपाही लाल नामक ग्रामीण के युवा बेटे संत कुमार (बजरंग) की पत्नि गुड्डी बाई ने अज्ञात कारणों से लगभग पांच वर्ष कनेर बीज का सेवन कर लिया था। जिससे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं इस घटना की जानकारी मिलने के बाद संतकुमार ने भी फांसी लगा ली। माॅ पिता की मौत के बाद 8 माह की बच्ची समेत एक बेटी व एक बेटी अनाथ हो गए।

माॅ पिता की मौत के बाद 8 माह की बेटी अनंद कुमारी (दीमा) का लालन पालन उसकी दादी ने किया। वहीं 4 साल के विनीत व 2 साल की मिनाक्षी को पता ही नहीं चला कि अब उनके माता पिता इस दुनिया में नहीं रहें। दो लड़कियों व एक लड़के का लालन पालन किसी प्रकार बूढ़े दादा दादी अब तक करते आ रहें हैं। लेकिन अब उनके कंधें भी जवाब देने लगें हैं।

मिनाक्षी अब 6 साल की हो गई हैै वह भी गांव के दूसरों बच्चों की तरह खेलना कूदना चाहती है, पढ़ना लिखना चाहती है। लेकिन परिवार की माली हालत ऐसी नहीं हैं कि दोनों बेटियों के सपनों को पूरा कर सकें। यही वजह है कि मिनाक्षी ने आज तक स्कूल का मुॅह तक नहीं देखा जबकि उसे पढ़ने की बड़ी इच्छा है।

भूख क्या होती है यह इन बच्चों और उनके बूढे़ हो चले दादा के बयान से साफ-साफ बयां होता है। मिनाक्षी के दादा कहतें है कि स्कूल भेजने से क्या होगा दो जोड़ी कपड़े मिल जाएंगे, एक टाईम का खाना मिल जाएगा। लेकिन साहब छोटे छोटे बच्चों को जब तक तीन चार बार खाना नहीं मिले तो उनके पेट की आग कैसे ठंडी हो।

एक ओर कोरिया जिले में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन इस अभियान के पीछे की कड़वी हकीकत यह है कि लिंगानुपात के मामले में कोरिया जिला पूरे प्रदेश में 27 वें नंबर पर है। इससे आसानी से समझा जा सकता है कि कोरिया जिले में यह अभियान सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। ऐसा न होता तो मनेन्द्रगढ़ से बिल्कुल सटी हुई ग्राम पंचायत में रहने वाले इन दो बेटियों को आज दूसरों के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

इनका कहना है – प्रदीप कुमार साहू, एसडीएम मनेन्द्रगढ़ – परसगढ़ी में हुए घटनाक्रम में मेरे द्वारा खुद जाॅच की जा रही है। महिला को श्रद्धांजलि योजना के तहत पंचायत के द्वारा आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। सामाजिक बहिष्कार के मामले की जांच मेरे द्वारा की जा रही है। वहीं लालपुर में यतीम बच्चों के मामले में मुझे आपके द्वारा जानकारी दी जा रही है। मै मामले की जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाउॅगां।

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