नई दिल्ली / देश एक लंबे वक़्त से इंतज़ार कर रहा था कि मुस्मिल महिलाओं के साथ सालों से होने वाले अन्याय पर देश की सबसे बड़ी पंचायत लगाम लगाएगी और गुरुवार को राज्यसभा में ऐसा मौका भी था, लेकिन सामने आ गई हितों और अस्तित्व की राजनीति। विपक्ष एक नई मांग लेकर सामने आ गया, तो सदन के शोर-शराबे ने एक ज़रूरी कदम को टाल दिया।
तारीख बदल गई लेकिन हालात नहीं बदले। गुरुवार को एक बार फिर तीन तलाक के बिल के मसले पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंकझोंक हुई। हंगामा बढ़ा और आखिरकार सदन की कार्यवाही को शुक्रवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इसके साथ ही तीन तलाक से जुड़ा अहम बिल एक दिन के लिए फिर टल गया। गुरुवार देर शाम तीन तलाक से जुड़ा बिल जैसे ही राज्यसभा के सामने चर्चा के लिए आया, कांग्रेस ने फिर से अपने संशोधन पर जोर दिया। लेकिन सरकार ने साफ कहा कि विपक्ष का प्रस्ताव अवैध है क्योंकि संशोधन प्रस्ताव 24 घंटे पहले आना चाहिए था।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें जारी रहीं। कांग्रेस समेत विपक्ष के कुछ दल संशोधन की मांग और बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग पर जोर देते रहे जिसकी वजह से हंगामा बढ़ता गया। उपसभापति ने सदन को शांत कराने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहने पर सदन को स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस के हंगामे के चलते बिल फिर से लटकने पर बीजेपी और सरकार ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। सरकार का कहना है कि एक बार फिर कांग्रेस का महिला विरोधी रवैया सामने आ गया है।
मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिलाने और उन्हें तीन तलाक की क्रूर प्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए मोदी सरकार लगातार कोशिश कर रही है और पिछले हफ़्ते लोकसभा में इससे जुड़े बिल को पारित कराया लेकिन राज्यसभा में संख्या बल का फायदा उठाकर कांग्रेस ने फिर इसमें रोड़ा अटका दिया। दरअसल राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत में होने की वजह से सरकार के लिए इस बिल को पास कराना एक चुनौती है। सरकार चाहती है कि राज्यसभा में भी यह बिल ठीक उसी तरह पास हो जाए जैसे लोकसभा में पास हुआ और इसे राष्ट्रपति के पास दस्तखत के लिए भेजा जा सके ताकि यह फौरन कानून बन सके। सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये बिल लेकर आई है जिसके तहत तीन तलाक को आपराधिक, दंडनीय और गैर जमानती बनाया गया है।
यह बिल एक बार में तीन तलाक को अपराध घोषित करता है और इसमें तलाक की इस प्रथा का इस्तेमाल करने वाले के ख़िलाफ़ अधिकतम तीन साल की जेल व जुर्माने का प्रावधान है। यह मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण व बच्चे की निगरानी का अधिकार देता है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को सत्र का आखिरी दिन और है और उस दिन कुछ ज्यादा विधायी कामकाज नहीं हो पाता। ऐसे में बिल के लटकने की आशंका बढ़ गई है ऐसे में मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के मसले पर कानूनी संरक्षण मिलने में कुछ और वक्त लग सकता है।
