नई दिल्ली / भारत में घटने वाली आतंकवादी घटनाओं के पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान का हाथ जरूर होता है। एक तरफ पाकिस्तान आतंकवादियों को भारत में बड़े पैमाने पर घुसपैठ कराता है तो दूसरी तरफ अलग-अलग अवैध तरीकों से भारी मात्रा में पैसा भेजकर आतंकी घटनाओं को अंजाम देता है। कौन नहीं जानता जम्मू-कश्मीर में चाहे पत्थरबाजी हो या आतंकी घटनाएं या फिर देश के अन्य हिस्सों में होने वाली हिंसा, ऐसी ज्यादतर घटनाओं के पीछे पाकिस्तान का भेजा हुआ पैसा ही काम कर रहा होता है, लेकिन इसे रोकने के लिए कानूनी रूप से अब तक कोई बहुत कड़ी कार्रवाई नहीं की गई थी। अब पहली बार देश में अब तक की ऐसी सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में आतंकी फंडिंग के मामले में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है।
आतंक के खिलाफ देश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि एनआईए ने आतंकी फंडिग मामले में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज़ सईद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख सैय्यद सलाहुद्दीन सहित 12 आरोपियों के नाम शामिल हैं। पहली बार ऐसा हुआ है, जब हुर्रियत के कई बड़े नेताओं, अलगाववादियों, पत्थरबाजों और हवाला कारोबारियों पर भी जबर्दस्त शिकंजा कसा गया है।
एनआईए ने 12,794 पन्नों की चार्जशीट तैयार की है, जिसके लिए आधार बनाया गया आतंक के खिलाफ देश की सबसे बड़ी जांच को। जांच करते समय एनआईए ने 60 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे। इस कार्रवाई में जांच एजेंसी ने 950 से ज्यादा दस्तावेज और 600 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद की। जांच के दौरान एनआईए ने 300 से ज्यादा गवाहों से भी पूछताछ की।
पाकिस्तानी एजेंसियों की शह पर काम कर रहे आतंकी हाफिज सईद और सैयद सलाहुद्दीन पर एनआईए की चार्जशीट में आरोप हैं कि उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने और कश्मीर घाटी में तनाव फैलाने के लिए फंडिंग की है। चार्जशीट में आरोपित किए गए तमाम आरोपियों के खिलाफ लोगों को पैसे देकर विद्रोह भड़काने और जम्मू-कश्मीर में आतंकी और अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप है।
इनमें हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अलताफ अहमद शाह, गिलानी के पीए बशीर अहमद भट, आफताब अहमद शाह, ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीडिया एडवाइजर नईम अहमद खान, अलगाववादी नेता फारूक अहमद डार, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (आर) के चेयरमैन मोहम्मद अकबर खांडे, अलगाववादी नेता राजा मेहराजुद्दीन कलवल, तहरीक-ए-हुर्रियत के जहूर अहमद शाह वटल और दो पत्थरबाज कामरान यूसुफ और जावेद अहमद भट के नाम शामिल हैं।
आरोप-पत्र के मुताबिक जांच में मिले सबूतों और दस्तावेजों से ये साबित होता है कि आरोपियों ने हुर्रियत नेताओं, आतंकवादियों और पत्थरबाज़ों के साथ मिलकर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने, हिंसा और अशांति फैलाने के साथ अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए लगातार साजिशें रची और जिसमें उनको मदद मिली पाकिस्तान से काम कर रहे आतंकी संगठनों और पाकिस्तानी एजेंसियों की।
जांच में ये भी पता चला कि ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता अपने नेटवर्क के सहारे न सिर्फ युवाओं को भड़का रहे हैं बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले के लिए उनको उकसा भी रहे हैं। इसके साथ ही वो उनके पास हथियार और पैसे पहुंचाने के लिए अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोची समझी साजिश के तहत और पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर वो हड़ताली कैलेंडर जारी करने और सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार का अभियान भी चला रहे हैं। आरोप-पत्र में इस बात का भी पुख्ता तरीके से जिक्र है कि पाकिस्तान से किस तरह पैसा हवाला सहित विभिन्न माध्यमों के जरिए जम्मू-कश्मीर में भेजा गया। दरअसल घाटी में आतंकवादियों को वित्तीय मदद के कई स्रोत हैं, इसमें हवाला फंडिंग, पाकिस्तानी उच्चायोग, नियंत्रण रेखा के पार से होने वाला व्यापार, जाली नोट, बैंक लूट, उगाही और फर्जी कंपनियां प्रमुख हैं।
हालांकि 2016 में केंद्र सरकार की ओर से की गई नोटबंदी ने आतंकी फंडिंग पर सबसे बड़ी लगाम लगाई थी. इसकी वजह से फंडिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई। रही-सही कसर एनआईए की कार्रवाई ने पूरी कर दी। एनआईए ने इस मामले में बीते साल 30 मई को केस दर्ज किया गया था। साथ ही इस मामले में पहली गिरफ्तारी बीते साल 24 जुलाई, 2017 को हुई थी। नोटबंदी और एनआईए की कार्रवाई से घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग रुक ही गई हैं क्योंकि उन्हें पैसे ही नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा आतंकी पर निर्णायक वार में सेना और सुरक्षाबलों की बड़ी भूमिका हैं, जिन्होंने 2017 में 215 से ज्यादा आतंकी ढेर कर दिए।
