हिंसक भालू घर में घुस 6 मवेशियों को बनाया शिकार, रेसक्यू कर पकड़ाया भालू, देखें वीडियों…

बिलासपुर / मरवाही वनमंडल का भालू एक बार फिर हिंसक हुआ है। ताजा मामले में भालू ने मरवाही वन परिक्षेत्र के बंधौरी गाव में 6 मवेशियों को जान से मार दिया है तो वही दो को गंभीर रूप से घायल भी किया है। हालांकि भालू को 28 घंटे बाद बिलासपुर से आई टीम ने ट्रैनकुलाइज कर रेसक्यू कर पकड़ लिया गया है।

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आपको बता दे कि भालुलैंड के नाम से मशहूर मरवाही वनमंडल जो भालू का प्राकृतिक रहवास इलाका है। इन दिनों यहाँ के ग्रामीण भालू की दहशत से खौफजदा है। पहले तो भालू ग्रामीण इलाको में ग्रामीणों की फसलो को नुक्सान पहुचता थे और उन्हें खाकर वापस चला जाता थे। पर
बीते एक माह में भालू और इंसानों का जिस तरह आमना -सामना हो रहा है वो आने वाले किसी बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रहे है। ताजा मामला मरवाही वन परिक्षेत्र के बंधौरी गाव का है। जहा कल सुबह 9 बजे भालू जंगल से उतारकर सीधे गाव में घुस आया। इस दौरान पहले तो उसने ग्रामीणों को दौड़कर काटने की कोशिश की जिसके बाद ग्रामीणों ने किसी तरह उससे दुरी बनाकर अपनी जान बचाई पर कुछ ही देर में भालू एक घर की दीवाल से चढ़कर छप्पर से होता हुआ स्थानीय ग्रामीण अमर सिंह गोंड के आँगन में दाखिल हो गया। जिसे देख घरवालो ने अपने कमरे बंद कर लिए जिसके बाद मरवाही वनमंडल को सुचना दी गयी और वहा से आई रेसेक्यु टीम ने छप्पर खोलकर किसी तरह ग्रामीण और उसके पुरे परिवार को घर के बाहर निकाला।  घर के अन्दर किसी को ना पाकर हिंसक हो चुके भालू ने घर में बांधे मवेशियों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया और एक – एक करके 6 मवेशियों की जान ले ली। जिसके बाद दुसरे कमरे में बंधे भैसों के पास जा घुसा और लगातार उन्हें अपना शिकार बनाने की कोशिश की। तभी मवेशियों की कराहने और भालू की हिंसक आवाजे पुरे गाव में गूंजती रही। हालांकि भालू के रिहायशी इलाके में घुस आने की वजह से वन विभाग ने एहतियातन पूरा गाव खाली करा लिया था। क्योकि उन्हें उम्मीद थी की सुना इलाका पाकर भालू घर से बाहर निकल जायेगा पर हिंसक हो चूका भालू लगातार मवेशियों को घायल करता रहा। इस दौरान भालू इतना हिंसक और गुस्से में था कि जब स्थानीय वन कर्मियों ने भैंसे को तबेले से निकला तो भालू ने आँगन में दौड़ा कर भैस का शिकार करने और उसे काटना जारी रखा। भालू के इस अप्रत्यासित व्यवहार से संसाधन विहीन मरवाही वनमंडल भी ख़ौफ़ में था। बाद में बिलासपुर से आई स्पेशल टीम ने जब भालू को ट्रैनकुलाइज कर बाहर निकाला तो अंदर अपने घर की हालत और मृत मवेशियों को देखकर ग्रामीणों के आसू बह निकले। उन्होंने कहा की भालू के द्वारा ऐसी हिंसा न कभी सुनी है ना देखी।

भालू कल सुबह लगभग 9 बजे ग्रामीण इलाके में घुसा था और 10 बजे के आस पास घर में घुस चूका था। जिसे आज दोपहर लगभग 2 बजे ट्रैनकुलाइज कर बाहर निकाला गया। मतलब इस पुरे घटनाक्रम में वन विभाग को 28 घंटे से ज्यादा लग गए। जो टीम बिलासपुर से आई थी वह भी पूर्ण प्रशिक्षित नहीं थी उनके डॉट भी लगातार मिस हो रहे थे। जहां अनुभव की कमी साफ़ नजर आ रही थी। इस पुरे घटनाक्रम में अच्छी बात यह रही की भालू ने किसी इंसान की जान नहीं ली। हालांकि उसने घर में मौजूद कई सामानों को तोड़ डाला जिसका वन विभाग मुआयना कर मुआवजा देने की बात कह रहा है। पर जो महत्वपूर्ण बात देखने में आई वो यह थी की बिलासपुर से आई टीम ने भालू का बिना परिक्षण करे बिना देखे ही ये बयान दे दिया की अंदर मौजूद भालू गर्भवती है और उसी वजह से उसने इतनी हिंसा फैलाई है।

पूरा मरवाही वनमंडल भालू प्रभावित क्षेत्र है और जाम्बवंत प्रोजेक्ट के तहत ही आता है। पर पूरी परियोजना सिर्फ कागजो में है। भालू लगातार भोजन पानी की तलाश में रहवासी इलाको में आ रहे है और हिंसक घटनाये को अंजाम दे रहे है। बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर योजना पर पलीता लगा रहे है। अब भी अगर इन घटनाओ से सबक नहीं लिया गया और गंभीर कदम नहीं उठाये गए तो आगे होने वाले संघर्षो में भालू या इंसान दोनों की हानि होना तय है। 

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