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“हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचे, कोई गांव न छूटे” — जल जीवन मिशन संचालक कमल किशोर सोन का बस्तर दौरा


रायपुर, 4 मई 2026।
भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के मिशन संचालक कमल किशोर सोन ने सुकमा और दंतेवाड़ा जिले का दौरा कर मिशन के कार्यों का जमीनी जायजा लिया। उन्होंने गांवों में पहुंचकर नल-जल योजनाओं की स्थिति देखी और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पेयजल की गुणवत्ता की जानकारी ली।


दौरे के दौरान उन्होंने सुकमा जिले के डोडपाल और फायदागुड़ा तथा दंतेवाड़ा के भूसारास गांव में योजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी परिवार को पानी की समस्या नहीं होनी चाहिए और कोई भी गांव जल जीवन मिशन से वंचित नहीं रहना चाहिए।


गांवों में पहुंचकर किया निरीक्षण
डोडपाल में सोन ने पानी टंकी, जल वितरण प्रणाली और गुणवत्ता जांच प्रक्रिया का अवलोकन किया। ग्रामीणों ने बताया कि योजना शुरू होने के बाद अब उन्हें हैंडपंप पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और घर-घर स्वच्छ पानी मिल रहा है। उन्होंने अधिकारियों को बारिश के मौसम में नियमित जल परीक्षण कराने के निर्देश दिए।


फायदागुड़ा में उन्होंने सोलर पंप आधारित पेयजल योजना का निरीक्षण किया और जल संचयन व सिस्टम के बेहतर रखरखाव पर जोर दिया। उन्होंने ग्राम स्तर पर तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने के निर्देश भी दिए।


भूसारास में ‘जल अर्पण’, पंचायत को सौंपी जिम्मेदारी
दंतेवाड़ा के भूसारास में लगभग 2.82 करोड़ रुपए की लागत से बनी नल-जल योजना का निरीक्षण करते हुए सोन ने घर-घर जाकर जल आपूर्ति देखी। उन्होंने अपने सामने पानी की गुणवत्ता का परीक्षण भी कराया और संतुष्टि जताई।


इस दौरान ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम के तहत योजना के संचालन और संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपी गई। ग्रामीणों ने बताया कि योजना से गांव में पेयजल संकट पूरी तरह खत्म हो गया है।


कलेक्टरों की बैठक लेकर की समीक्षा
सुकमा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सोन ने राज्य के सभी कलेक्टरों की बैठक लेकर मिशन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पेयजल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान कर समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि हर गांव में कम से कम एक व्यक्ति को प्रशिक्षित किया जाए ताकि छोटी तकनीकी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो सके। साथ ही छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।


किसी भी परिवार को न हो जल संकट
हर गांव तक पहुंचे नल-जल योजना
पानी की गुणवत्ता जांच हो नियमित
जल संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस
स्थानीय स्तर पर तकनीकी समाधान के लिए प्रशिक्षण


बस्तर के दूरस्थ इलाकों में जल जीवन मिशन के कामों की जमीनी हकीकत परखते हुए केंद्र ने साफ संकेत दिया है कि अब फोकस सिर्फ योजना लागू करने पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, सतत संचालन और हर घर तक वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करने पर है।

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