जनहित याचिका पर सुनवाई, 13 मई को अगली तारीख; नियमों के पालन पर उठे गंभीर सवाल
रायपुर, 4 मई 2026। छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित प्लास्टिक के खुलेआम उपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने मुख्य सचिव से विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी।
जमीन पर फेल कानून, बढ़ता प्लास्टिक का जाल
राज्य में प्लास्टिक एंड नॉन-बायोडिग्रेडेबल मटेरियल एक्ट-2020 और नियम-2023 लागू होने के बावजूद हालात चिंताजनक हैं।
पॉलिथीन कैरी बैग, नॉन-वुवेन बैग, डिस्पोजेबल कप-प्लेट, स्ट्रॉ, फ्लेक्स-बैनर, थर्मोकॉल सजावट, छोटे PET बोतल—सब पर प्रतिबंध है, फिर भी बाजारों और सड़कों पर इनका उपयोग धड़ल्ले से जारी है।
सरकार की कार्यवाही पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अगस्त 2024 से लगातार शिकायतें और सुझाव दिए जा रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नवंबर 2025 में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को उच्च स्तरीय समिति का प्रस्ताव भेजने को कहा था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
याचिका में बड़ा खुलासा—सिस्टमेटिक फेलियर
याचिका में दावा किया गया है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक की पूरी सप्लाई चेन सक्रिय है—
राज्य में ही उत्पादन या बाहर से सप्लाई
GST बिल के जरिए बिक्री
होटल और ऑनलाइन डिलीवरी में खुलेआम उपयोग
नियमों में मिली छूट का दुरुपयोग
क्या हैं सख्त सुझाव?
याचिकाकर्ता ने समाधान के लिए बड़े कदम सुझाए हैं—
उच्च स्तरीय समिति का गठन
सीमाओं पर SIT और RTO-पुलिस से सघन चेकिंग
फैक्ट्रियों की बिजली खपत से उत्पादन का खुलासा
GST डेटा से अवैध कारोबार की जांच
फ्लेक्स, नॉन-वुवेन बैग की लैब जांच
छूट भी बनी ‘ढाल’
दवाइयों, कृषि और कुछ पैकेजिंग को दी गई छूट का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल हो रहा है, जिससे प्रतिबंध प्रभावहीन हो गया है।
अब सरकार की परीक्षा
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब सबकी नजर सरकार के शपथ पत्र पर टिकी है। यह तय करेगा कि पर्यावरण सुरक्षा के कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या जमीन पर भी लागू होंगे।
