** ‘‘सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना’’ यह इस आम बजट का सबसे बड़ा झूठ : कांग्रेस
** केंद्र सरकार को न तो कृषि की समझ और न ही किसानों की परेशानियों की
रायपुर / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल एवं नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ‘‘सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना’’ यह इस आम बजट का सबसे बड़ा झूठ है। केन्द्र सरकार को न तो कृषि की समझ और न ही किसानों की परेशानियों की। मोदी सरकार का लोकसभा चुनाव के पूर्व अंतिम पूर्ण बजट निराशाजनक, जनआकांक्षाओं को पूरा करने एवं चुनौतियों का सामना करने में विफल रहा है।
वित्तमंत्री अरूण जेटली द्वारा प्रस्तुत आम बजट से किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, महिलाओं एवं युवाजनों सहित समाज के सभी वर्गो को घोर निराशा हुई है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे तुगलकी फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को पहले ही पटरी से उतार दिया है इसलिये वित्तमंत्री के पास बजट में कुछ विशेष करने का अवसर ही नहीं था।
उन्होने कहा कि किसानों को फिर से छला गया है। वित्तमंत्री एक तरफ 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने की बात करते हैं लेकिन इसका कोई रोडमेप नहीं बताते। पिछले तीन सालों में मोदी सरकार ने किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य देने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। किसानों के कर्जमाफी पर बजट मौन है, लेकिन बड़े कार्पोरेट घरानों पर एन.पी.ए. बैंक लोन 2014 में 2 लाख करोड़ रू. से बढ़कर 8 लाख करोड़ रू. की वसूली को लेकर कोई चिंता नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने 2014 में युवाओं के लिये 2 करोड़ रोजगार सृजन का वायदा किया था लेकिन साल में दो लाख लोगों को रोजगार तक नहीं दे सकें। अब बजट में यह आंकड़ा 2 करोड़ से घटकर 70 लाख हो गया है। लेकिन इन्हें रोजगार कैसे मिलेगा इसकी कोई कार्य-योजना नहीं है। उन्होने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी कोई विशेष राहत नहीं दी गई है। गरीबों को पांच लाख के स्वास्थ्य बीमा कवर की योजना का हश्र भी किसानों की फसल बीमा योजना के समान होगा। फसल बीमा का लाभ सूखाग्रस्त किसान को नहीं मिला लेकिन फसल बीमा करने वाली निजी इंश्योरेंस कंपनियां मालामाल हो गई।
उन्होने आगे कहा कि बजट भाषण में पेट्रोल-डीजल पर दो रूपया की कमी की कोई जिक्र नहीं था, लेकिन बजट भाषण समाप्त होने के बाद अचानक यह घोषणा की गयी लेकिन इसके साथ ही सेस लगाकर इस राहत को निष्प्रभावी कर दिया। उन्होने कहा कि यू.पी.ए. सरकार के दौर में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम प्रोडक्टस की कीमत 130 डालर तक पहुंच गयी थी तब भी पेट्रोल 71 रू. एवं डीजल 65 रू. में मिल रहा था, लेकिन मोदी सरकार के दौर में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह मूल्य गिरकर 50 डालर तक पहुंच गया था इस हिसाब से पेट्रोल 50 रू. एवं डीजल 40 रू. में मिलना चाहिये था। लेकिन मोदी सरकार ने पेट्रोल पर एक्साईज ड्यूटी रू. 9.48 से बढ़ाकर 21.48 तथा डीजल पर एक्साइज ड्यूटी रू. 3.56 से बढ़ाकर 17.33 रू. कर दी। इस प्रकार पेट्रोलियम प्रोडक्टस की कीमतों में गिरावट के लाभ से आम आदमी को वंचित कर दिया। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर जीएसटी लगाकर लोगों को राहत पहुंचाने की कोई घोषणा नहीं की गयी। रेल बजट भी निराशाजनक रहा, इसमें रेल सुरक्षा, पटरियों के दुरस्तीकरण की कोई योजना नहीं है। उन्होने कहा कि मोदी सरकार का यह बजट आम आदमी का फ्रेंडली न होकर कार्पोरेट फ्रेंडली है।
