अलग-अलग जगह इस त्यौहार को अलग-अलग नाम से जानते है:-
महाराष्ट्र में – रंग पंचमी
मथुरा में – लाठी मार होली
हरियाणा में – दुलन्दी होली
पंजाब में – होला मौहल्ला
बिहार में – फगवा
गोवा में – सिंगो
तमिलनाडु में – कमान पंडिगे
पश्चिम बंगाल में – ढोल पूर्णिमा
1. होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे वसंत ऋतु में मनाया जाता है।
2. यह त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
3. इस त्यौहार को बड़े धूमधाम से नेपाल और भारतीय प्रवासी देशो में मनाया जाता है।
4. यह त्यौहार दो दिन का होता है, पहले दिन होलिका दहन होता है और दूसरे दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाते है।
5. यह त्यौहार प्रहलाद, हिरणाकश्यप और होलिका की धार्मिक कहानी से जुड़ा है।
6. यह त्यौहार रंग और राग का संगम है, इसलिए लोग रंग खेलने के साथ-साथ नाचते गाते भी है।
7. फाल्गुन मास में मनाए जाने के कारण होली को फाल्गुनी भी कहा जाता है।
8. मुगल काल में भी होली के बहुत सारे किस्से मिलते है। अकबर का जोधाबाई और जहांगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन हुआ है।
9. शाहजहां के जमाने में होली को ईद-ए-गुलाबी कहा जाता था।
10. इस दिन भगवान कृष्ण ने पूतना नाम की राक्षसी का वध किया था इसलिए इस त्यौहार की बृज में बहुत मान्यता है।
11. लेकिन सबसे ज्यादा मान्यता भक्त प्रहलाद की कहानी है जिनके पिता हिरण्यकश्यप खुद को भगवान मानने लगे थे। अगर कोई उनका विरोध करता था, तो वो उसे मरवा देते थे। लेकिन जब प्रहलाद ने उनका विरोध किया तो उन्होंने अपनी बहन होलिका को प्रहलाद के साथ आग में बिठा दिया। होलिका को वरदान था कि वो जल नहीं सकती लेकिन उस दिन इसके विपरीत हुआ और वो जल गई और प्रहलाद बच गया, तब से होलिका-दहन होने लगा।
12. भारत के कई हिस्सों में होली को पांच दिनों तक भी मनाते है।
