दुर्गेश सिह बिसेन ✍ पेण्ड्रा ✍
00 आखिर क्यों राहुल गांधी को आना पड़ रहा है पेण्ड्रा…?
छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद पहले मुख्यमंत्री बने अजीत जोगी अपनी वाकपटुता और भाषाओ पर पकड़ की वजह से आम जनता के बीच सीधी पैठ बनाने में कामयाब रहे वे जब तक कांग्रेस में थे उनके समानांतर कोई भी खड़ा नहीं हो सका।
हालांकि आम चुनाव में वजह कोई भी रही हो सरकार नहीं बना सके यह भी सच्चाई है, पर चाहे अपने चुनाव क्षेत्र के लिए भाजपा के विधायक से सीट छुड़वा कर चुनाव जीतना हो या पहले चुनाव में हार की वजह बनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कमान संभाल रहे कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल को उनकी पराम्परागत सीट से भीषण दुर्घटना के बावजूद हराना, जोगी की चुनावी ताकत सब जानते हैछत्तीसगढ़ अलग होने के बाद पहले मुख्यमंत्री बने अजीत जोगी अपनी वाकपटुता और भाषाओ पर पकड़ की वजह से आम जनता के बीच सीधी पैठ बनाने में कामयाब रहे। जब तक कांग्रेस में थे उनके समानांतर कोई भी खड़ा नहीं हो सका। हालांकि आम चुनाव में वजह कोई भी रही हो सरकार नहीं बना सके यह भी सच्चाई है, पर चाहे अपने चुनाव क्षेत्र के लिए भाजपा के विधायक से सीट छुड़वा कर चुनाव जीतना हो या पहले चुनाव में हार की वजह बनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कमान संभाल रहे कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल को उनकी पराम्परागत सीट से भीषण दुर्घटना के बावजूद हराना, जोगी की चुनावी ताकत सब जानते है।
वही उसी सीट से पिछले चुनाव में मिली हार भी सब जानते है.. खैर जो भी हो पर छत्तीसगढ़ में आज भी बड़े नेताओं में वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और अजीत जोगी का ही नाम आता है.. इन दोनों के अलावा अब भी ऐसा कोई नेता नहीं जो इस छोटे से राज्य में अपनी खुद की मजबूत पकड़ रखता हो।
अगर पिछले चुनाव की बात करे तो दोनों पार्टियों के बीच वोट का अंतर दशमलव में ही है, तो डर इस बात का भी है कि कही जनता अगले चुनाव में कांग्रेस के बजाय जोगी की पार्टी पर न विश्वास जता दे, क्याकि कांग्रेस 3 बार से सरकार बनाने में असफल रही और जोगी 2 वर्षो में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सो में कई बार दौरा कर अपनी पार्टी के बारे में बता चुके है।
हालाँकि कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने के बाद चुनोतियाँ कई थी जोगी को उनकी उम्मीद के अनुसार जितने विधायको का साथ मिलना था नहीं मिला.. जोगी ने खुद जिस प्यादे को प्रदेश कांग्रेस में युवा नेतृत्व दिला कर देश में पहचान दिलाई उसने भी उनका साथ छोड़ दिया बावजूद कुछ विधायको को समर्थको को साथ लेकर जोगी के छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ दौरे और जनसंपर्क और समर्थन ने जोगी के अलग होने के बाद एक हुई कांग्रेस की पेशानी पर बल ला दिया।
दूसरी और जोगी के अलग होने के बाद कांग्रेस के दूसरी पक्ति के नेता भी खुद को मुख्यमंत्री पद के दावेदार समझने लगे, 2 साल पहले नेता प्रतिपक्ष ने सबसे पहले मुझ से ही CM पद के दावेदारों की फेहरिस्त गिनवाईं थी।
खुद मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने भी मरवाही में जोगी को प्रदेश की तीसरी बड़ी शक्ति बता दिया..जोगी के नई पार्टी बनाने के बाद दोनों पार्टियों ने लगातार उन्हें घेरने को कोशिस की पर जनता के बीच जोगी की पैठ की खबर सब के पास है, फिलहाल दौड़ सत्ताधारी दल के अलावा कौन दूसरी बड़ी पार्टी है इसके लिए है।
रायपुर में जोगी ने अपने जन्मदिन के बहाने 72 का आंकड़ा और कार्यकर्ताओं की विशाल फ़ौज दिखा कर अपनी ताकत बता दी, शायद जोगी की इसी ताकत को देखने के बाद कांग्रेस ने आपने कार्यकर्ताओ में जान फूंकने के लिए राहुल दरबार का रुख किया..
आलाकमान भी ये जानता है कि एक बार फिर से खेमो में बटी कांग्रेस का वर्तमान प्रदेश नेतृत्व जोगी और रमन से अपने दम पर एक साथ टक्कर नहीं ले सकता ..इसलिए उसने भी अपने नेताओं को मायूस न करते हुए रमन के साथ सीधे जोगी के गढ़ पेण्ड्रा में आदिवासी सम्मलेन के लिए हामी भर दी।
आदिवासी सम्मलेन इसलिए क्योंकि आदिवासी क्षेत्रों में जोगी की पैठ उन्हें भी पता है.. जोगी खुद भी रमन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने के अलावा मरवाही से ही चुनाव लड़ने की बात जता चुके है।
शायद कांग्रेस इसी वजह से उन्हें उन्ही की सीट पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है..
पिछले चुनाव में उनके सीट छोड़ने के बाद उनके पुत्र अमित जोगी मरवाही सीट से प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटो से जीत कर आये थे तब उनका चुनाव चिंन्ह पंजा था, शायद इसीलिये ही इस क्षेत्र में संकल्प शिविर के बहाने पूरा कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व एक जुट होकर मरवाही में कार्यकर्ताओ को जोड़ने की कोशिस की थी, पर रायपुर में जोगी के शक्ति प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी ने जोगी को मरवाही में ही घेरना ठीक समझा है।
इससे क्या फायदा होगा ये तो चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद ही पता चलेगा…
पर ये तो तय है कि ये राहुल गांधी का ये दौरा जोगी की नई पार्टी के लिए संजीवनी का ही काम करेगा।
