रायपुर / माओवादियों का मुहतोड़ जवाब देने के लिए बस्तर के आदिवासी युवाओं की बस्तरिया बटालियन पूरी तरह तैयार हो गई है। बस्तरिया बटालियन में शामिल हुई 189 जाबांज़ बहनों को प्रदेश के मुखिया डॉ रमन सिंह ने सलाम किया है। डॉ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि बटालियन में संभाग की आदिवासी बहनों के लिए 33% आरक्षण बस्तर को अमन और चैन के मार्ग पर अग्रसर करेगा। बस्तरिया बटालियन में शामिल हुई 189 जाबांज़ बहनों को मेरा सलाम।
आपको बता दे कि सीआरपीएफ के इस अनोखी बटालियन में बस्तर संभाग के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों से ही आदिवासी युवाओं की भर्ती की गई है। युवाओं को जंगल युद्ध, हथियार चलाने, मानचित्र अध्ययन, पुलिस कानून और बिना शस्त्र लड़ाई का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। पहले चरण में 739 अभ्यर्थियों का किया गया था चयन। जिसमें 189 महिला समेत 534 रिक्रूटों को प्रशिक्षण दिया गया। बता दे कि इनका प्रशिक्षण 44 सप्ताह चला।
गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के गुरिल्ला वार का जवाब अब उनकी मांद में घुसकर बस्तरिया बटालियन की मर्दानी देंगी। सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन की पहली खेप में 189 महिला जवान फुलप्रूफ ट्रेनिंग के बाद नक्सल मोर्चे पर उतरने को तैयार हैं। स्थानीय होने के कारण इन जवानों को नक्सलियों की राजधानी कहे जाने वाले अबूझमाड़ की भौगोलिक स्थिति का पूरा ज्ञान है। ऐसे में स्थानीय लड़ाकों की जानकारी और सीआरपीएफ जवानों के जज्बे के सामंजस्य से नक्सलियों की कमर तोड़ने में सफलता मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नागा बटालियन की तर्ज पर बस्तरिया बटालियन बनाने का सुझाव दिया था, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2016 में स्वीकार करते हुए भर्ती प्रकिया शुरू की थी। छत्तीसगढ़ सरकार का मानना है कि स्थानीय युवाओं के फोर्स में आने से आदिवासियों के बीच एक बेहतर संदेश जाएगा और नक्सलवाद की ओर से उनका रुझान कम होगा। आदिवासियों को सरकार के साथ लाने में भी ये लड़ाके काम करेंगे, जिससे बस्तर में शांति स्थापित होने की संभावना जताई जा रही है।
