दिल्ली / देश में डीएनए टेस्ट कराना आसान होगा. इसकी जांच में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए और इसके लैब्स की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार की मंशा है कि देशभर में एक डीएनए बैंक हो। सरकार ने डीएनए आधारित फोरेन्सिक तकनीक के इस्तेमाल को विस्तार देने के लिए डीएनए तकनीक (प्रयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2018 को मंजूरी दी है। विधेयक को कानूनी रूप देने के पीछे प्राथमिक उद्देश्य देश की न्यायिक प्रणाली को सहयोग प्रदान करना एवं उसे सुदृढ़ बनाने के लिए फोरेन्सिक तकनीक को बढ़ावा देना है।
विधेयक में इस बात का भी भरोसा दिलाया गया है कि डीएनए टेस्ट परिणाम विश्वसनीय हो और नागरिकों के गोपनीयता अधिकारों के लिहाज से डाटा का दुरुपयोग न हो सके। इससे एक तरफ गुमशुदा व्यक्तियों तथा देश के विभिन्न हिस्सों में पाये जाने वाले अज्ञात शवों की परस्पर मिलान आसान होगी, तो बड़ी आपदाओं के शिकार हुए व्यक्तियों की पहचान करने में भी सहायता होगी।
फोरेन्सिक डीएनए प्रोफाइलिंग का ऐसे अपराधों के समाधान में स्पष्टरूप से महत्व है, जिनमें मानव शरीर जैसे हत्या, दुष्कर्म, मानव तस्करी या गंभीर रूप से घायल, संपत्ति चोरी और डकैती से संबंधित मामले से जुड़े अपराध। 2016 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देश में ऐसे अपराधों की कुल संख्या हर साल तीन लाख से अधिक है. इनमें से केवल बहुत छोटे हिस्से का ही वर्तमान में डीएनए टेस्ट किया जाता है.
