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पेट्रोल-डीजल के मूल्य में कमी ‘‘ऊंट के मुंह में जीरा’’ – कांग्रेस

रायपुर / प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री, पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ प्रवक्ता रमेश वर्ल्यानी ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर 2.50 – 2.50 रुपए प्रति लीटर एक्साइज एवं रेट घटाए जाने को ऊंट के मुंह में जीरा निरूपित करते हुए कहा है कि देश में व्याप्त जन-आक्रोश और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के कारण यह कमी की गई है। लेकिन जैसे ही चुनाव संपन्न हो जाएंगे, पेट्रोल-डीजल की कीमतें पुनः बढ़ा दी जाएगी। कर्नाटक चुनाव के बाद ऐसा ही किया गया था। 

प्रवक्ता श्री वर्ल्यानी ने कहा है कि एनडीए के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने तेल के दामों को अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार के दामों के साथ जोड़ा था और यह नीति बनाई थी कि जब-जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होंगे उस अनुपात में देश के अंदर तेल की कीमतों में कमी अथवा बढ़ोतरी की जाएगी। लेकिन मोदी सरकार ने इसके विपरीत जाकर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम 130 डालर प्रति बैरल से घट कर 40-50 डॉलर प्रति बैरल तक आ गए तो देश में तेल के दामों में कमी करने के बजाय मनमाने ढंग से एक्साइज दरों में बढ़ोतरी कर जनता को 9 लाख करोड रुपए के लाभ से वंचित कर दिया। लेकिन जैसे ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 40 डालर से बढ़कर 50-60-70-85 डालर तक तेल की कीमतें बढ़ने लगी तो उसका भार जनता पर डाल दिया गया। परिणाम स्वरुप डीजल-पेट्रोल के भाव 70 से 90 रू. तक पहुंच गए। अंतर्राष्ट्रीय बाजार की दर के हिसाब से देश में आज भी पेट्रोल 50 रू. और डीजल 45 रू. प्रति लीटर की दर से मिलना चाहिये। विधानसभा चुनाव के डर से दाम में मामूली कमी की गई है, लेकिन देश की जनता इनके झांसे में नहीं आने वाली है।

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