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संजय चौहान की कविता संग्रह “दर्द कुछ यूँ” के विमोचन पर भव्य कार्यक्रम

कोरिया / शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था चिरमिरी के प्रशिक्षण अधिकारी एस.के. चौहान द्वारा रचित कविता संग्रह “दर्द कुछ यूँ” का विमोचन किया गया।

प्रशिक्षण अधिकारियों ने मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर लघु सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। जिसमें प्रशिक्षणार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना, निबंध, नृत्य इत्यादि मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई। जिसे देखकर प्रशिक्षणार्थियों का मन उत्साह से भर गया। जिसमें कोपा सहित समस्त व्यवसाय के प्रशिक्षणार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 

उक्त कार्यक्रम में संस्था के प्रभारी प्राचार्य गणित एवं ड्राइंग के प्रशिक्षण अधिकारी ए.के.साव ने कहा कि श्री चौहान को लेखन का शौक विद्यार्थी जीवन से ही था। हमें अत्यंत खुशी हो रही है कि उनका काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है। एम.के.हरमुख ने संग्रह *दर्द कुछ यूँ* के बारे में बतलाते हुए कहा कि साहित्य अभियान द्वारा प्रकाशित यह श्री चौहान की प्रथम कविता संग्रह है। जिसमें बचपन, माँ-पिताजी, बुढ़ापा, रिश्ते, किसान एवं जिंदगी से संबंधित अनेकों दर्द का बयान किया गया है, निश्चित ही यह पाठकों को पसंद आएगी।

श्री चौहान अपनी रचित काव्य संग्रह की एक कविता संसार के सभी माताओं के सम्मान में सुनाएं जो इस प्रकार है –

दूर रहकर भी पास बहुत है ।
मां है यही एहसास बहुत है ।।
क्या-क्या गिनाऊँ मैं माँ की देन,
ये शरीर और सांस बहुत है ।।
दिल को हिम्मत देने खातिर।
वो लोरी की रात बहुत है ।
मिट्टी का घर चेहरे पर झुर्रियां।

पुरानी साड़ी है पर खास बहुत है।

क्यों जाएं हम मंदिर मस्जिद
मां पर हमें विश्वास बहुत है ।।
दूर रहकर भी पास बहुत है ।
मां है यही एहसास बहुत है।।

साथ ही यह भी स्पष्ट किए कि वे इस क्षेत्र में नये हैं। इसलिए वास्तव में सुधि पाठक वर्ग ही बतला पाएंगे कि उनकी कविता कैसी एवं किस स्तर की है। संचालन इंग्लिश लैंग्वेज के प्रशिक्षण अधिकारी धुव्रजी कुमार ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से पी.के.पांडे, आर.बी. शुक्ला, डी.डी.सिंह, एल.के.पांडे, डी.के .तिवारी, यशवंत राजवाड़े, एम .साहू, डी.के .पटेल एवं बड़ी संख्या में समस्त व्यवसाय के प्रशिक्षणार्थी मौजूद थे।

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