PC – नान के पूर्व संचालक शिवशंकर भट्ट ने कहा – जब तक उच्च न्यायलय से निर्देश नही हो जाता मैं आदतन अपराधी नही बन सकता …

रायपुर / नान के पूर्व संचालक शिवशंकर भट्ट ने प्रेसवार्ता कर अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा नान में केवल 12 या 14 लोगो ने ही घोटाला नहीं किया, मुझे 10 रुपय तक का निर्णय लेने का पावर नही था और जब तक उच्च न्यायलय से निर्देश नही हो जाता मैं आदतन अपराधी नही बन सकता।

बता दे कि नान के पूर्व संचालक शिवशंकर भट्ट ने प्रेसवार्ता में बताया कि राज्य में 1 अप्रैल 2001 को नागरिक आपूर्ति निगम का स्थापना हुई था, पहले देश पर निर्भर होना पड़ता था। ऐसा चावल देशभर के विभिन्न हिस्सों से आता था जिसको प्रदेश की जनता पसन्द नही करती थी। राज्य की जनता के लिए एक योजना मैंने बनाई थी, कांग्रेस और बीजेपी ने पीडीएस योजना को मंजूरी विधानसभा में मिली थी।

5 अप्रैल 2002 को इसकी अनुमति मिली 16 अप्रैल से चालू हुआ था। उन्होंने कहा कि फ़ूड के क्षेत्र में 5 संस्था कार्य करती है, उनमें से एक नान भी है 40 से 50 प्रतिशत चावल नान में आता है, राईस मिल से चावल लेना और राशन दुकान तक पहुचाना ही नान का कार्य है।

पर ये पूरा घोटाला जो उजागर हुआ उसे सिर्फ यह कह दिया गया कि नान का है, ये दूसरा घोटाला था जिसे नान में डाला गया। नान के पास 9लाख 35 हजार का स्टॉक था वो भी 6 महीने के लिए रमन सिंह पुन्नलाल मोहिले ने उन पर दबाव डालकर 10 लाख से अधिक मीट्रिक टन चावल खरीदने को कहा गया।

सारा चावल एफसीआई ले इसके लिए केंद्र से बात होनी थी, पर नही हुई। अचानक नान के ऊपर ही प्रेसर डाला गया। हमने बताया था यहां हानि होगी। 51 लाख राशनकार्ड था उनको विधानसभा चुनाव से पहले 72 लाख बनवाया गया। लेकिन इस राशन कार्ड से राशन नहीं बंटा उस समय मुख्यमंत्री रमन सिंह ने खुद स्वीकार किया था, 12 लाख राशन कार्ड फर्जी है।

हमने बात रखी थी चुनाव के बाद राशन बाटेंगे पर वह भी दबाव बनाया गया नवम्बर 2013 में पंचायतों स्कूलो के अंदर अनाज रखवाया गया ताकि रातोरात इसका सप्लाई कराया जा सके। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव 2014 के समय भी राज्य सरकार ने कहा था। राशन अभी नही बांट सकते इसके बाद राशनकार्ड निरस्त की बात आई, जाँच हुई लेकिन रिपोर्ट नही आई। मार्कफेड के लिए जो नियम बने थे उसे राज्य सरकार ने बदल दिया,

नान में केवल 12 या 14 लोगो ने ही घोटाला नहीं किया, मुझे 10 रुपय तक का निर्णय लेने का पावर नही था, पर ये जब घटना हुई तो पूरा ठीकरा मुझपर ही फोड़ दिया गया। राशन के मुद्दे को मैंने उठाया था राशन घोटाले को छुपाने के लिए ही नान पर छापा पड़ा, जितने सेम्पल लिए उसे रात को लिए गए, गोडाउन में न ही कोई अधिकारी यहां जांच के दौरान मौजूद थे। नान में 5 करोड़ 38 लाख का हमपर आरोप लगे है Cag की ऑडिट रिपोर्ट आई है, उनके बाद भी हमे जेल के भीतर रखा गया।

डॉ रमन द्वारा आदतन अपराधी कहा गया है मुझे,,,,मैं भी डॉ रमन का पर्सनल सेक्रेटरी बना था, अगर मैं आदतन अपराधी होता तो मुझे विजिलेंस क्रियरेन्स क्यों मिलती। विधानसभा में मामला आया और मुझे जेल में डाल दिया गया। जब तक उच्च न्यायलय से निर्देश नही हो जाता मैं आदतन अपराधी नही बन सकता।

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