कोरिया / त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान सम्पन्न हुआ इस चुनाव में जिला पंचायत की सबसे हाई प्रोफाइल सीट क्रमांक 7 पर उम्मीद के मुताबिक निर्दलीय के रूप में वेदांती तिवारी ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है, समर्थकों का नारा अबकी बारी वेदांती तिवारी वास्तव में इस बार सच हुआ और दो बार विधानसभा का चुनाव हारने के बाद श्री तिवारी अंततः जिला पंचायत सदस्य बनने में कामयाब हो गए।
इस सीट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार अनिल साहू दूसरे और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अनिल जायसवाल तीसरे स्थान पर रहे, कई मतदान केंद्रों मे कांग्रेस 10 का आंकड़ा भी नही पार कर सकी, बैकुंठपुर ब्लॉक की तीनों सीट पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी को मुंह की खानी पड़ी है जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रणनीतिकारों के होश उड़ गए हैं। वहीं पिछली बार की तुलना में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया दो सीटों पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार विजय राजवाड़े और सुनीता कुर्रे की जीत हुई है, जिससे भाजपा खेमे में खुशी की लहर है।
ज्ञात हो कि कुड़ेली क्षेत्र की जिला पंचायत सीट पर पूर्व में ही हमने वेदांती तिवारी की स्पष्ट जीत की बात कही थी और हुआ भी ऐसा। चुनाव के दौरान शुरु से ही इस क्षेत्र में निर्दलीय के रूप में वेदांती तिवारी को जनता का समर्थन दिखाई दे रहा था, जो कि सच साबित हुआ। चुनाव में भारी गहमागहमी के बीच मतगणना का कार्य सम्पन्न हुआ, कुछ केंद्रों में तो देर रात तक मतगणना सम्पन्न हो सका, मतदान पश्चात जैसे ही मतगणना शुरू हुई और रुझान आने शुरू हुए वैसे ही वेदांती तिवारी के पक्ष में एकतरफा वोट पड़ने की सूचना से समर्थक खुशी से झूम उठे उनके गृह ग्राम कुड़ेली से लेकर समूचे निर्वाचन क्षेत्र में समर्थकों ने खूब जश्न मनाया।अभी तक हालांकि आधिकारिक रूप से प्राप्त मतों की घोषणा नही की गई है फिर भी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वेदांती तिवारी को लगभग 14000 मत प्राप्त हुए हैं तो वहीं भाजपा समर्थित अनिल साहू को लगभग 7000 और कांग्रेस समर्थित अनिल जायसवाल को लगभग 3000 मत प्राप्त हुए हैं इस प्रकार पार्टी के निर्णय का विरोध कर मैदान में उतरे वेदांती तिवारी ने लगभग 7000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की है।
कांग्रेस प्रत्याशी अनिल जायसवाल वेदांती तिवारी से लगभग 11000 वोट से पीछे रहे। ज्ञात हो कि इस सीट पर श्री तिवारी को पार्टी द्वारा समर्थन न दिए जाने से मामला काफी दिलचस्प हो चुका था, कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से स्वयं विधायक अम्बिका सिंहदेव, समेत तमाम बड़े नेता जिलाध्यक्ष नजीर अजहर, योगेश शुक्ला, अजय सिंह, भूपेंद्र यादव आदि मोर्चा संभाल रखे रहे जिससे इनकी भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी तो इस चुनाव को वेदांती तिवारी के लिए राजनैतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा था। जिसमे की अपने समर्थकों के बल पर सत्ता और संगठन का दबाव झेलकर उन्होंने बड़ी जीत हासिल करते हुए कांग्रेस के एक धड़े को जबरदस्त पटकनी दी है।
पूरे चुनावी प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता दो भाग में बंट गए, जिससे अब कांग्रेस में उहापोह की स्थिति भी निर्मित हो गई है।
सबकी नजर वेदांती के अगले कदम पर – चुनाव के दौरान टिकट न दिए जाने के बाद जिस प्रकार श्री तिवारी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरे और उन्होंने जगह जगह चुनावी सभा के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व पर जमकर प्रहार किया। स्थानीय विधायक से लेकर संगठन को उन्होंने आड़े हाथ लेते हुए जमकर आरोप लगाया,कांग्रेस प्रत्याशी ने अनेक व्यक्तिगत तथ्यहीन आरोप भी वेदांती तिवारी पर लगाया इसके बावजूद उनके पक्ष में मतदाताओं ने सहानुभूति के साथ जमकर मतदान किया जिससे वेदांती तिवारी जीत सके।चुनाव के दौरान जिस प्रकार दोनों गुटों में आपसी तनातनी देखने को मिली उससे अब कांग्रेस में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं ।जीत के बाद श्री तिवारी बहुत मजबूती के साथ उभरे हैं उनके साथ कार्यकर्ताओं की फौज है,जो कि अब श्री तिवारी के किसी भी निर्णय को स्वीकार करने को तैयार हैं। चुनाव में कांग्रेस के नेताओ में वेदांती तिवारी के प्रति जबरजस्त दूरी बढ़ी है,उन्होंने चुनावी वैतरणी तो पार कर ली जिसके बाद अब पूरे क्षेत्र में लोग उनके अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
जीतकर पहुँचे कुमार साहब की समाधि स्थल – चुनाव में एकतरफा जीतने के बाद बुधवार को वेदांती तिवारी अपने आदर्श पूर्व वित्तमंत्री स्व डॉ रामचंद्र सिंहदेव के पैलेस के पीछे स्थित समाधि स्थल पहुँचे और पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी। एक बार फिर उन्होंने दोहराया कि वे कुमार साहब के बताए मार्ग का अनुसरण करेंगे और उनके सिद्धान्तों पर चलेंगे।
ज्ञात हो कि चुनाव के दौरान हर सभा मे श्री तिवारी द्वारा कुमार साहब का नाम लिया जाकर उन्हें अपना आदर्श बताया जा रहा था जिसे लेकर विवाद भी हुआ कांग्रेस नेताओं ने विधायक अम्बिका सिंहदेव के नेतृत्व में बैठक भी किया जिसके बाद स्वयं विधायक द्वारा श्री तिवारी को प्रचार में कुमार साहब का नाम लेने से अप्रत्यक्ष तौर पर रोका गया। जिसके बाद भी चुनावी सभा मे नाम लिये बगैर वेदांती तिवारी ने कुमार साहब को याद किया था।अब जीतने के बाद भी उन्होंने समाधी पर जाकर पुष्प अर्पित किया जिसके बाद कांग्रेस खेमे ने चुप्पी साध ली है।

