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माइंनिंग विभाग का फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर कांट्रेक्टरों ने करोड़ो की गड़बड़ी, 100 केस में 93 मामले फर्जी, अब…?

कोरिया / नगर निगम, एसईसीएल समेत पीडब्लूडी विभाग में होने वाले किसी भी निर्माण कार्य में कांट्रेक्टर को अंतिम भुगतान तभी करना है, जब उसे माइंनिंग से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। लेकिन कोरिया जिले के चिरमिरी नगर निगम में जिला माइंनिंग विभाग का फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर कांट्रेक्टरों ने करोड़ो रूपए की गड़बड़ी के मामले को अंजाम दे दिया है। अब मामले को खुलासा होने के बाद नगर निगम, माइंनिंग समेत जिला प्रशासन में हड़कम्प मचा हुआ है। फिलहाल निगम के रिकार्ड की जांच शुरू हो गई।

माइनिंग अधिकारी त्रिवेणी देवांगन ने बताया कि साल 2019 से सितंबर 2020 तक किए गए निगम क्षेत्रांर्गत विभिन्न निर्माण कार्यो के 100 केस में से 93 माइंनिंग क्लीयरेंस के मामले फर्जी मिले है। दो साल के रिकार्ड में 66 लाख की गड़बड़ी मामला सामने आया है। जिसके लिए खनिज विभाग एफ आई आर की तैयारी कर ली है। अब माइनिंग विभाग ने चिरमिरी निगम से बीते 2016 से निर्माण कार्यो की सूची और पूरी जानकारी मंगाई है और जिले के सभी निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि जिला खनिज विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस के बगैर किसी भी प्रकार का भुगतान ठेकेदार को नही किया जाना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा है कि इस गड़बड़ी की एसईसीएल, पीडब्लूडी जिले के सभी नगरीय निकायों में की जाएगी। गड़बड़ी सामने आने पर माइनिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें की खनिज विभाग के द्वारा रायल्टी की राशि घन मीटर के हिसाब से तय है। जैसे रेत, ईंटा, गिट्‌टी, मिट्‌टी, मुरूम समेत अन्य प्रकार के खनिज जिनका इस्तेमाल निर्माण कार्य में ठेकेदार के द्वारा किया जाता है। अब इसे एैसे समझिए कि एक करोड़ के भवन निर्माण में खनिज विभाग के द्वारा एक लाख की रॉयल्टी विभिन्न सामग्री के उपयोग के लिए खनिज विभाग को भुगतान करना होता है।

फिलहाल यह बड़ा मामला जरूर है पर देखना होगा की मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने वाले कौन-कौन अधिकारी ठेकेदारों हैं और किसन किसके साथ मिलकर राज्य सरकार को लाखों के राजस्व का चूना लगाया हैं।

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