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सीडी कांड में नया मोड़: विनोद वर्मा पहुंचे हाईकोर्ट, CBI को नोटिस

राजेश मूणत से जुड़े बहुचर्चित सेक्स सीडी केस में सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती, जुलाई में अगली सुनवाई

बिलासपुर/रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel के पूर्व राजनीतिक सलाहकार Vinod Verma ने सत्र न्यायालय द्वारा लगाए गए आपराधिक अभियोग को Chhattisgarh High Court में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह मामला वर्ष 2017 में सामने आए उस कथित सेक्स सीडी कांड से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन मंत्री व भाजपा नेता Rajesh Munat का नाम सामने आया था। उस समय सीडी को लेकर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आया था और कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने आ गए थे।

शुक्रवार को जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान विनोद वर्मा की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और श्रेया गुप्ता ने दलील दी कि सीबीआई की चार्जशीट खुद यह स्वीकार करती है कि जिस शिकायत के आधार पर गाजियाबाद स्थित उनके घर पर छापा मारा गया था, वह आरोप साबित नहीं हुए। इसके बावजूद उन्हें आरोपी बनाया गया।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि कथित अश्लील सीडी भाजपा से जुड़े कुछ लोगों द्वारा मुंबई में तैयार कराई गई थी और उसमें राजेश मूणत का चेहरा जोड़ा गया था। बचाव पक्ष ने कहा कि पत्रकारों के बीच सीडी वितरित करना “अश्लील सामग्री प्रसारित करने” की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उन पर लगाए गए अभियोग टिकाऊ नहीं हैं।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2017 में राज्य पुलिस ने पहले भयादोहन और बाद में आईटी एक्ट के तहत अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। इसके बाद गाजियाबाद में विनोद वर्मा के घर दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।

सीबीआई ने 2018 में पेश चालान में विनोद वर्मा और भूपेश बघेल समेत भाजपा से जुड़े कैलाश मुरारका, विजय पांडे और कारोबारी विजय भाटिया को भी आरोपी बनाया था। हालांकि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले भूपेश बघेल को आरोपों से मुक्त कर दिया था, लेकिन सत्र न्यायालय ने बाद में वह फैसला पलट दिया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या अन्य आरोपियों ने भी इसी तरह की याचिका दायर की है। इस पर बताया गया कि फिलहाल यह पहली याचिका है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई माह में होगी।

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