00 उपपंजीयक व दस्तावेज लेखक की पैसे लेने की शिकायत कलेक्टर से।
कोरिया बैकुण्ठपुर । 11 नवम्बर को एक रजिस्ट्री में रजिस्ट्रार ने पैसे लेकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की थी। रजिस्ट्रार पी. द्वीवेदी ने दस्तावेज लेखक तेजबली चक्रधारी के माध्यम से पैसे की खबर भेजवायी और पैसों की मांग की जिसकी शिकायत कोरिया कलेक्टर तक पहुंच चुकी है।
शिकायत के अनुसार मामला 11 नवम्बर 2020 का है जहां विके्रता पटना क्षेत्र के एक जमीन का सौदा किया और दो लोगों को बेचा जिसकी रजिस्ट्री के लिये उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री की सारी प्रक्रिया अर्जी नवीस ने पूरी किया गया और जैसे ही रजिस्ट्रार के समझ क्रेता विक्रेता उपस्थित हुये और आॅनलाईन सम्बन्धित सारी प्रक्रिया कर ली गयी। आखरी डिजिटल हस्ताक्षर के दौरान उप पंजीयक ने यह कहा कि रजिस्ट्री नहीं होगी क्योंकि इसमें आपत्ति लगी हुयी है। जिस पर आपत्ति लगाने वाला व्यक्ति वहां मौजुद था क्योंकि वह खुद क्रेता था उसने कहा कि महोदय मैंने सीमांकन होने तक इस रजिस्ट्री पर रोक लगाने को कहा था पर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है और मैं सीमांकन से संतुष्ट होकर खुद क्रेता भी हूं। इसलिये मैं अपनी आपत्ति वापस लेता हूं और यदि आपकों मेरे द्वारा कोई लिखितत दस्तावेज चाहिऐ तो वह भी देने को तैयार हूं क्योंकि रजिस्ट्री आज कराना जरूरी है क्योंकि मैंने सारे पैसे विक्रेता को दे दिया है और आगामी पांच दिनों की छुट्टी है और विक्रेता पांच सौ किमी दूर से आया है जिससे रजिस्ट्री में विलंब हो जायेगी। तब रजिस्ट्रार ने कहा कि रजिस्ट्री नहीं हो पायेगी क्योंकि यह लेटर कलेक्टर के यहां से आया है और इसमें मुझे जवाब देना पड़ेगा। मैंने उनसे निवेदन किया कि सर रजिस्ट्री काफी जरूरी है इसे आज पूरा ही कर देवें। मेरे मजबूरी को देखते हुये रजिस्ट्रार ने अर्जी नवीस तेजबली व महोबिया के माध्यम से यह सूचना दिलायी की रजिस्ट्री तो मैं पूरा कर दूंगा पर इसके एवज में एक पार्टी से 50 हजार चाहिऐ। मैंने काफी उनसे निवेदन किया पर उन्होंने नहीं माना अंततः मुझे काफी मिन्नतों व दस्तावेज लेखक तेजबली के जरिये बात कराते हुये मुझे दबाववश उपपंजीयक पी. दिवेदी को 30 हजार रूपये देने पड़े तब जाकर डीजिटल हस्ताक्षर हुये और रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण हुआ। इन सबके बाद आखिरकार उपपंजीयक द्वारा मुझसे वही काम कराया गया जो मेरे द्वारा पहले बोला गया था मुझसे इस बात का शपथ पत्र लिया गया कि मेरे द्वारा लगायी गयी आपत्ति वापस लेता हूं और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। तब मैंने उनसे कहा कि सर मुझसे यही कराना था तो आपने मुझे परेशान क्यों किया और मेरे से इतने पैसे क्यों लिये। जब आप मेरे से पैसे ले सकते है तो आप इस तरह का प्रोपेगेंड़ा कर कितने लोगों से पैसे लेते होंगें।
