कोरिया / जिले के एकमात्र नेशनल पार्क जो भविष्य में टाइगर रिजर्व के रूप में जाना जाएगा उसकी निगरानी और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर मौजूदा समय मे पदस्थ अधिकारियों के क्रियाकलापों से सुरक्षित नजर नही आ रहा है।
राष्ट्रीय उद्यान में वन्य प्राणियों के देखरेख और सुरक्षा के लिए करोड़ो रूपये सालाना शासन से मिलते है, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पदस्थ अधिकारियों के कंधे पर होता है। लेकिन वर्तमान में गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में कुछ ऐसे भी अधिकारी पदस्थ है जो अपने कर्तव्यों से विमुख नजर आ रहे है।
हम बात कर रहे है जिले के एक मात्र राष्ट्रीय उद्यान गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुंठपुर का जहाँ पदस्थ अधिकारी शाम ढलते ही कंठ गिला करने के जुगाड़ में मुख्यालय छोड़कर शासकीय वाहन समेत कटगोड़ी घाट उतार जाते है या यूं कहें कि थकान मिटाने खिंचे चले आते है तो गलत नही होगा।
ऐसा केवल राष्ट्रीय उद्यान में ही नही बल्कि सामान्य वनमंडल के अधिकारी भी कई मर्तबा शासकीय वाहनों में शासकीय शराब भट्ठी में देखे गए है, तो इसका यह मतलब निकाला जाए कि दिन भर जंगल में भ्रमण के बाद थकान दूर करने अधिकारियों को नियम कानून को दरकिनार और लोक लाज को नजरअंदाज कर यहाँ तक का सफर करना पड़ रहा है।

