00 16 साल की लड़की को नक्सली बताकर मार दिया गया था
रायपुर / मीना खलको हत्याकांड में 11 वर्ष बाद फैसला आया है। रायपुर की अदालत ने आरोपित तीनों पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त कर दिया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश शोभना कोस्टा की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। जानकारी के अनुसार इस मामले में पुलिसकर्मी धर्मदत धनिया, जीवनलाल रत्नाकर और निकोदिम खेस आरोपित बनाए गए थे। आरोप था कि इन्होंने 16 साल की लड़की मीना को गोली मारी।
गौरतलब है कि छह जुलाई 2011 को बलरामपुर के लोंगरटोला में पुलिस फायरिंग में मीना की मौत हुई थी। उस दौरान पुलिस ने मीना को नक्सली बताया था।
न्यायिक जांच के हुए थे आदेश – घटना के बाद पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगा। आदिवासी युवती की मौत के बाद काफी बवाल मचा था। शासन की ओर से न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे। न्यायिक जांच में 42 पुलिस अधिकारियों और जवानों पर हत्या और हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया था। जांच आयोग की रिपोर्ट पर केस दर्ज करने के बाद मामले की बारीकी से जांच की गई, पुलिस अफसरों व जवानों के बयान लिए गए। बताया जा रहा है कि इस जांच के दौरान 46 से ज्यादा लोगों के बयान लिए गए। इनमें 42 पुलिस कर्मी के साथ आसपास के लोग भी शामिल थे।
यह था पूरा मामला – बलरामपुर के लोंगरटोला में 16 वर्ष की आदिवासी किशोरी मीना खलको की गोली लगने से मौत हुई थी। पुलिस ने मीना को नक्सील बताया था और पुलिस का कहना था कि झारखंड से आए नक्सलियों के साथ दो घंटे तक चली मुठभेड़ के दौरान मीना को गोली लगी थी। मीना नक्सलियों की वर्दी में थी और उसने पुलिस पर फायरिंग भी की थी। बताया जा रहा है कि इस बारे में लोंगराटोला और मीना के गांव करंचा के ग्रामीणों का कहना था कि उस रात उन्होंने केवल तीन गोलियों की आवाज सुनी थी। मीना के परिजनों के सात ही राजनीतिक दलों और गैरसरकारी संगठनों ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने मीना का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे मौत के घाट उतार दिया।
