रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को अजीब नज़ारा देखने को मिला। पानी की किल्लत और जल जीवन मिशन पर बहस के दौरान सरकार को घेरने का काम विपक्ष के बजाय खुद सत्ता पक्ष के विधायकों ने कर डाला! विपक्ष ने मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर वॉकआउट कर लिया, लेकिन सदन के भीतर सत्ता पक्ष के ही विधायक सरकार से सवालों की बौछार करते रहे।
“पाइपलाइन बिछी तो पानी कहाँ?”
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने जल जीवन मिशन को लेकर सवाल उठाया कि “653 जलस्रोत विहीन गांवों में पाइपलाइन और टंकी आखिर कैसे बन गई?” उन्होंने पीएचई मंत्री अरुण साव से पूछा कि क्या इन जगहों का पहले सर्वे नहीं किया गया था? अगर किया गया, तो फिर गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अमृत मिशन, लेकिन पानी नहीं!
रायपुर में अमृत मिशन की स्थिति पर भाजपा विधायक राजेश मूणत ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “पूरे शहर में 24×7 जल आपूर्ति का दावा किया गया, लेकिन एक भी वार्ड ऐसा नहीं है, जहां सातों दिन चौबीसों घंटे पानी मिल रहा हो!” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 411 करोड़ खर्च होने के बाद भी राजधानी को पानी न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार से ही सरकार पर हमले!
दिलचस्प यह रहा कि इन सवालों को लेकर विपक्ष से पहले सत्ता पक्ष के ही विधायक हमलावर रहे। विपक्ष ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मंत्री की कोई तैयारी नहीं थी, तभी उनकी ही पार्टी के विधायक सवालों की बौछार कर रहे हैं!”
बड़ी बातें:
✅ 19656 गांवों को जल जीवन मिशन में शामिल किया गया।
✅ योजना 2024 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब 2028 तक बढ़ा दी गई।
✅ 80.03% घरों तक नल कनेक्शन पहुंच चुके हैं।
✅ 2711 पानी टंकियों का निर्माण किया गया।
✅ 351 ठेकेदारों के अनुबंध रद्द किए गए, 15 ठेकेदारों को बाहर किया गया।
अब सवाल यह है कि सरकार इन गड़बड़ियों पर क्या कार्रवाई करेगी, या फिर इस पर भी कोई नया ‘मिशन’ लॉन्च होगा?