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बिल्डर-भूमाफिया बेलगाम: रेरा-टीएनसी की मंजूरी भी नहीं रोक पा रही उपभोक्ताओं की लूट


बिलासपुर।
शहर के रियल एस्टेट कारोबार में बिल्डर और भू-माफियाओं की मनमानी अब सभी सीमाएं लांघ चुकी है। रेरा (RERA) और टाउन एंड कंट्री (T&C) जैसे नियामक भी इनके आगे लगभग बेबस नजर आ रहे हैं। ताजा मामला सृष्टि इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के चर्चित प्रोजेक्ट स्वर्णिमा एरा का है, जिसमें खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कोरबा शाखा में पदस्थ योगेश यादव ने 2019 में इस प्रोजेक्ट के फेस-3 के अंतर्गत सी1/100 नंबर का 2 BHK मकान खरीदा था। अग्रिम भुगतान करने के बाद कोविड काल के कारण निर्माण में विलंब हुआ। प्रोजेक्ट का आधिकारिक अनुबंध 2021 में हुआ और 36 माह के भीतर यानी नवंबर 2024 तक हैंडओवर का वादा किया गया। लेकिन समय बीत जाने के बाद भी मकान अब तक पूरा नहीं हो सका है।

जब योगेश यादव ने नवंबर 2024 में मकान का निरीक्षण किया तो सामने आया कि दीवारों में दरारें, छत में सीपेज, टूटी हुई फ्लोर टाइल्स, खराब पाइपलाइन और अमानक इलेक्ट्रिक फिटिंग जैसे गंभीर निर्माण दोष मौजूद हैं। कंपनी प्रबंधन को कई बार लिखित व ईमेल के माध्यम से शिकायत की गई लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। उलटे कंपनी प्रबंधन ने योगेश यादव पर हैंडओवर लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात तो तब सामने आई जब योगेश यादव को पता चला कि उनका मकान किसी अन्य को किराये पर दे दिया गया है और उनके घर में घरेलू सामान भी रखा गया है — वह भी बिना किसी अनुमति के। विरोध करने पर योगेश यादव को न सिर्फ अपने ही मकान का निरीक्षण करने से रोका गया, बल्कि बार-बार की शिकायत के बावजूद कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं की गई।

रेरा और T&C बने केवल कागजी औपचारिकता?

चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा प्रोजेक्ट रेरा और टाउन एंड कंट्री से विधिवत पास है। इसके बावजूद बिल्डर मनमानी कर रहा है। बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या रेरा और T&C विभाग केवल अनुमोदन देकर अपनी जिम्मेदारी खत्म मान लेते हैं? क्या इन एजेंसियों द्वारा पासिंग के बाद कोई जमीनी निरीक्षण नहीं किया जाता?

विशेषज्ञों का कहना है कि बिल्डरों को रेरा और T&C की मंजूरी मिलने के बाद उनके प्रोजेक्ट की कीमत बाजार भाव से औसतन तीन गुना तक बढ़ा दी जाती है। आम आदमी भारी कीमत चुकाने के बाद भी खुद को ठगा सा महसूस करता है।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा हौसला

इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासनिक एजेंसियों की चुप्पी ने बिल्डरों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। यह मामला न सिर्फ उपभोक्ता संरक्षण के कानूनों की धज्जियां उड़ाता है बल्कि रेरा और T&C जैसे नियामक संस्थाओं की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना यह है कि रेरा और टाउन एंड कंट्री विभाग इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्यवाही करते हैं और योगेश यादव को न्याय कब तक मिलता है।


सम्बंधित बड़े सवाल :

  • रेरा व टाउन एंड कंट्री द्वारा प्रोजेक्ट पासिंग के बाद निगरानी क्यों नहीं की जाती?
  • अगर निगरानी होती है, तो अब तक सृष्टि इंफ्राबिल्ड जैसे मामलों में कितनी बार कार्यवाही की गई?
  • क्या रेरा और T&C का अप्रूवल अब सिर्फ बिल्डरों के लिए प्रीमियम वसूलने का माध्यम बन गया है?

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