बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान तेज
रायपुर।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शुक्रवार को नई बिजली दरें जारी कर दी हैं। नई दरें अगस्त 2025 से लागू होंगी, जिसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 10 से 20 पैसे तक अधिक भुगतान करना होगा। इसके साथ ही कॉमर्शियल और कृषि उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त भार पड़ेगा।
आयोग और बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत और ऊर्जा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया गया है। हालांकि, इस मामूली वृद्धि को लेकर राज्य में सियासत गरमा गई है।
कांग्रेस का हमला
बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा: “हर ओर बीज-खाद की हाहाकार
जनता पर पड़ी बिजली बिल की मार..
स्कूलों पर लग रहा है ताला
खुली है “तावड़े की पाठशाला”
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ बिजली सरप्लस राज्य है, फिर भी यहां बिजली अन्य राज्यों की तुलना में महंगी है। उन्होंने कहा, “बीजेपी की सरकार बनने के बाद अब तक तीन बार बिजली दरें बढ़ चुकी हैं। हमारी सरकार में ‘बिजली बिल हाफ’ योजना थी, जिसे बंद कर जनता पर आर्थिक बोझ डाला गया है।”
सरकार की सफाई
इन आरोपों पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “बिजली दरों में जो संशोधन हुआ है, वह बहुत मामूली है। यह निर्णय जरूरत और लागत को ध्यान में रखकर लिया गया है। राज्य सरकार जनता की सुविधा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता दे रही है।”
सियासी पारा चढ़ा
बिजली दरों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। कांग्रेस इसे जनविरोधी निर्णय बता रही है, वहीं सरकार इसे आर्थिक मजबूरी और तकनीकी संतुलन के तहत उठाया गया कदम बता रही है। आने वाले दिनों में बिजली बिलों को लेकर सड़क से सदन तक विरोध की संभावना जताई जा रही है।
