अस्पताल स्टाफ को दिए मरीज-हित में काम करने के निर्देश
रायपुर, 23 जुलाई 2025।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बुधवार को राजधानी रायपुर स्थित मेकाहारा और डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (DKS हॉस्पिटल) का प्रातः 7 बजे औचक निरीक्षण किया। बिना किसी पूर्व सूचना के पहुंचे मंत्री जायसवाल का यह निरीक्षण पूरी तरह आकस्मिक था, जिसका उद्देश्य अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानना था।
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री जायसवाल ने अस्पताल में भर्ती बच्चों और महिला मरीजों से विशेष रूप से संवाद किया। उन्होंने उनके स्वास्थ्य की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, इलाज की गुणवत्ता, नर्सिंग देखभाल और अस्पताल परिसर की साफ-सफाई जैसी बातों पर विस्तार से जानकारी ली।
मरीजों के परिजनों से भी उन्होंने सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने।
स्वास्थ्य मंत्री ने OPD, IPD, ऑपरेशन थियेटर, दवा वितरण केंद्र, जांच प्रयोगशाला, वार्ड्स और अस्पताल की अन्य प्रमुख इकाइयों का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने साफ-सफाई, चिकित्सकीय सेवाओं की तत्परता और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता को लेकर अधिकारियों से सवाल पूछे और आवश्यक निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों से चर्चा करते हुए मंत्री श्री जायसवाल ने कहा –
“मरीजों की सेवा को ईश्वर की सेवा मानकर कार्य करें। अस्पताल में आने वाला हर व्यक्ति पीड़ा में होता है, हमारी संवेदनशीलता ही उसे राहत देती है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
सरकार का प्रयास है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों तक हर जगह मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिले।
मंत्री के आकस्मिक निरीक्षण से अस्पताल प्रबंधन भी सतर्क नजर आया और स्टाफ को मरीजों की सेवा में अधिक समर्पण भाव से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के प्रमुख बिंदु:
- महिला एवं शिशु वार्ड का विशेष निरीक्षण
- अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था का जायजा
- मुफ्त दवाओं की उपलब्धता की जानकारी
- स्टाफ से सीधा संवाद और कार्य के प्रति निर्देश
- मरीजों और उनके परिजनों से आत्मीय चर्चा
स्वास्थ्य मंत्री का यह औचक दौरा न सिर्फ निरीक्षण था, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश भी था।
