नक्सलियों के मंसूबे अब आसमान से: सुकमा के जंगल से ड्रोन बरामद, NIA की जांच में बड़ा खुलासा 


रायपुर, छत्तीसगढ़ में नक्सली अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि नक्सली अब निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। यह पहली बार है जब सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के ठिकाने से ड्रोन बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार, सुकमा जिले के गुंडराजगुडे़म जंगल में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों को नक्सलियों के एक ठिकाने से दैनिक उपयोग की सामग्री के साथ एक ड्रोन मिला। यह वही इलाका है जहां लंबे समय से पुलिस कैंप के आस-पास संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की रिपोर्टें मिल रही थीं। मुखबिर की सूचना पर जब सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी ली, तो यह ड्रोन बरामद हुआ।

ड्रोन की विशेषताएं:

  • इसकी रेंज लगभग 3 किलोमीटर तक बताई जा रही है।
  • यह ड्रोन ऐसा है जो आमतौर पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए उपयोग में लाया जाता है।
  • इसमें कोई विस्फोटक या दवा ले जाने की क्षमता नहीं है, यानी यह मालवाहक ड्रोन नहीं है।

हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नक्सली इस ड्रोन का इस्तेमाल केवल निगरानी के लिए कर रहे थे या किसी और उद्देश्य से भी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह निश्चित ही चिंता का विषय है। यह तकनीकी बदलाव नक्सलियों की रणनीति में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

NIA और सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन के मॉडल, उसके फ्लाइट डेटा और संभावित हैंडलर की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि यह ड्रोन संभवतः ऑनलाइन माध्यम से खरीदा गया होगा और इसका प्रशिक्षण स्थानीय युवाओं को दिया गया होगा।

इस घटनाक्रम के बाद बस्तर क्षेत्र में पुलिस कैंपों की निगरानी और भी सख्त कर दी गई है। ड्रोन जैसी तकनीकों के उपयोग से यह स्पष्ट होता है कि नक्सली अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर डिजिटल और तकनीकी रास्तों पर भी सक्रिय हो रहे हैं।



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