रायपुर, 25 जुलाई
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में रिक्त हो रहे उपराष्ट्रपति पद पर छत्तीसगढ़ से प्रतिनिधित्व देने की पुरजोर मांग की गई है। कांग्रेस ने साफ कहा है कि प्रदेश के नेताओं को अब तक केवल राज्य मंत्री स्तर की जिम्मेदारी ही दी गई, जबकि छत्तीसगढ़ के पास अनुभवी और सक्षम नेतृत्व की लंबी कतार है।
पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने लिखा है की “छत्तीसगढ़ के 11 में से 10 सांसदों ने लोकसभा में सक्रिय भूमिका निभाई है। रमेश बैस, डॉ. रमन सिंह, ननकी राम कंवर, धर्मलाल कौशिक जैसे दिग्गज नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।”
कांग्रेस का यह पत्र ऐसे वक्त आया है जब एनडीए उपराष्ट्रपति पद के लिए चेहरे की तलाश कर रही है। प्रदेश में बीजेपी की मजबूत पकड़ और पिछले दो दशकों में तैयार हुआ नेतृत्व, इस मांग को काफी राजनीतिक वजन देता है।
छत्तीसगढ़ से अब तक क्या मिला?
कांग्रेस ने पत्र में यह भी सवाल उठाया कि पिछले वर्षों में केंद्र में छत्तीसगढ़ से किसी नेता को उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति या कैबिनेट स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों नहीं मिली? “प्रदेश की लगातार अनदेखी न सिर्फ राजनीतिक तौर पर गलत है, बल्कि यह संघीय भावना के खिलाफ भी है।” — पत्र में लिखा गया।
बीजेपी के दिग्गजों का जिक्र, कांग्रेस की रणनीति साफ
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने जिन नामों का जिक्र किया है, वे सभी बीजेपी के कद्दावर चेहरे हैं — जैसे कि पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, और वरिष्ठ नेता धर्मलाल कौशिक। जानकार इसे कांग्रेस की एक रणनीतिक चाल मान रहे हैं, जिससे पार्टी एक ओर तो छत्तीसगढ़ का सवाल राष्ट्रीय मंच पर खड़ा कर रही है, दूसरी ओर बीजेपी को उसके ही पाले में घेरने की कोशिश कर रही है।
यह पत्र सिर्फ मांग नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दांव है — अगर बीजेपी छत्तीसगढ़ से किसी नेता को उपराष्ट्रपति बनाती है, तो कांग्रेस इसे अपनी जीत बताएगी और अगर नहीं बनाती, तो कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़ की उपेक्षा के तौर पर भुनाएगी।
