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पहले आदिवासी, अब ओबीसी… कांग्रेस किस जातिगत राह पर?

टिकट की टिकट पर दिल्ली पहुंचे नेता, क्या मिले टास्क या सिर्फ़ हाजिरी का नंबर?

रायपुर।
कभी “कांग्रेस का हाथ, सबके साथ” का नारा देने वाली कांग्रेस अब “कांग्रेस का हाथ, OBC के माथ” के मूड में दिख रही है। आदिवासी सम्मेलन के बाद अब दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ओबीसी महासम्मेलन करके कांग्रेस ने बता दिया कि जातिगत गणित में कोई भी अंक छोड़ा नहीं जाएगा।

छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक नेता टिकट की टिकट लेकर पहुंचे… भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू, धनेंद्र साहू, उमेश पटेल जैसे नाम सम्मेलन में हाजिर थे। बताया जा रहा है कि OBC नेताओं को दिल्ली दरबार से “मिशन 2029” के लिए कुछ टास्क भी मिले हैं — हालांकि ज़्यादातर नेता सिर्फ़ हाजिरी लगाकर ही लौट आए।

बीजेपी ने किया तंज

राज्य सरकार में मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि “ओबीसी आयोग को वैधानिक दर्जा मोदी सरकार ने दिया, योजनाओं का लाभ हर वर्ग को मिल रहा है… कांग्रेस नेता दिल्ली जाकर बस हाजिरी लगाते हैं, नंबर बढ़ाने।”

कांग्रेस ने किया पलटवार

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला बोले — “बीजेपी को ओबीसी याद आता है सिर्फ़ चुनाव के वक़्त, कांग्रेस सामाजिक न्याय के लिए लगातार काम कर रही है।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि लोकसभा में पिछड़ी सीटों पर पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस का यह ‘सामाजिक समीकरण सम्मेलन’ है। लेकिन सवाल यह है कि क्या जातियों का यह जोड़-घटाव वोट में तब्दील होगा या फिर सिर्फ़ पब्लिक रिलेशन का आयोजन रह जाएगा?

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