चिरिमिरी।
नगर निगम चिरिमिरी में सामने आया बीमा घोटाला अब स्थानीय प्रशासन की दीवारें लांघकर राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंच चुका है।
RTI कार्यकर्ता राकेश सिंह द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि निगम की 50 से अधिक गाड़ियों का बीमा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिखाया गया — न पॉलिसी नंबर थे, न बीमा कंपनी का नाम, और बारकोड भी फर्जी निकले।
घोटाला पिछले चार वर्षों से लगातार चल रहा था, और इस दौरान एक ही फर्म — ‘मंजिता ई-सेल्युशन CSC सेंटर’ — को हर वर्ष बीमा टेंडर दिया गया। RTI में मिले दस्तावेजों में साफ पता चला कि बीमा सिर्फ कागजों पर था, असल में गाड़ियाँ बिना किसी वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रही थीं।
गली-नुक्कड़ से PMO तक, चर्चा और आरोपों का दौर
अब यह मुद्दा सिर्फ निगम दफ्तर तक सीमित नहीं है।
पान के ठेले से लेकर हर गली-नुक्कड़ तक लोग इस घोटाले पर बहस कर रहे हैं। एक तरफ आम नागरिक गुस्से में हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाज़ी और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह घोटाला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि “उपरी स्तर की मिलीभगत” का नतीजा है। कुछ लोग इसे पूर्व महापौर और विधायक विनय जायसवाल के कार्यकाल का परिणाम बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि वर्तमान महापौर और आयुक्त ने 2023-24 में कैसे आंखें मूंद लीं?
RTI कार्यकर्ता ने किया निगम आयुक्त से लेकर प्रधानमंत्री तक शिकायत
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश सिंह ने इस पूरे मामले की शिकायत अब नगर निगम चिरिमिरी के आयुक्त, महापौर, जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक भेज दी है।
उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि:
- यह जनता के पैसे की लूट है,
- मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच हो,
- दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई,
- और जनता के पैसे की रिकवरी की जाए।
महापौर बोले – दूध का दूध, पानी का पानी करेंगे
महापौर राम नरेश राय ने मीडिया से कहा कि:
“हम इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करवा रहे हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जो पैसा जनता का है, उसे हर हाल में वापस लाया जाएगा।”
अब सवाल सिस्टम से — क्या यह सिर्फ चिरिमिरी तक सीमित है?
इस घोटाले ने अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है:
क्या ऐसा बीमा घोटाला सिर्फ चिरिमिरी तक सीमित है, या राज्य के अन्य नगर निगमों में भी ऐसी ही फाइलों में खेल चल रहा है? क्या हर साल लाखों रुपये का भुगतान सिर्फ कागज़ी “सुरक्षा” के लिए हो रहा है?
खास बिंदु:
- 50+ गाड़ियों का फर्जी बीमा
- बारकोड स्कैन करने पर अन्य वाहनों की जानकारी
- एक ही फर्म को 4 साल लगातार टेंडर
- शिकायत निगम से लेकर PMO तक
- जांच की मांग और जन आक्रोश
- राजनीति में शुरू हुई गर्मी
जनता का सवाल:
- क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या घोटाला फिर से दबा दिया जाएगा?
- क्या जनता के पैसों की वाकई होगी वापसी?
- क्या “विकास” के नाम पर लूट का नया मॉडल गढ़ा जा रहा है?
