“माओवाद खत्म होने की घोषणा से पहले सियासी घमासान: अगर खतरा खत्म तो बस्तर के जनप्रतिनिधियों को Z+ सुरक्षा क्यों?”


रायपुर।
छत्तीसगढ़ में माओवाद के खात्मे को लेकर सरकार की घोषणा से पहले ही सियासत गरमा गई है। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार दावा कर रही हैं कि बस्तर में माओवाद अपने अंतिम दौर में है और 31 मार्च के बाद इसे औपचारिक रूप से खत्म होने की स्थिति में बताया जा सकता है। लेकिन इसी बीच विपक्ष ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर माओवाद सच में खत्म होने जा रहा है तो फिर बस्तर और प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को दी गई भारी सुरक्षा व्यवस्था क्यों बरकरार है।


कांग्रेस का कहना है कि जब तक जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में तैनात हजारों जवान हटाए नहीं जाते, तब तक आम लोगों को यह विश्वास नहीं होगा कि माओवाद वास्तव में खत्म हो गया है। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के सवालों को राजनीतिक बताते हुए कहा है कि नक्सलवाद के खात्मे पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को इसका स्वागत करना चाहिए।


दरअसल, बस्तर लंबे समय तक देश में माओवादी गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। सुरक्षा बलों के लगातार अभियान, आत्मसमर्पण नीति और विकास योजनाओं के चलते पिछले कुछ वर्षों में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक कई शीर्ष माओवादी नेता मारे जा चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास की राह चुनी है। इसी आधार पर सरकार यह दावा कर रही है कि बस्तर में सशस्त्र माओवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।


लेकिन इसी दावे के बीच कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि अगर खतरा खत्म हो गया है तो फिर बस्तर और प्रदेश के कई जनप्रतिनिधि अब भी Z+ और Z श्रेणी की सुरक्षा में क्यों हैं।


छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का गणित
प्रदेश में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों को विभिन्न श्रेणियों की सुरक्षा प्रदान की गई है।

छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी
13 VIP जनप्रतिनिधि Z+ सुरक्षा में
बस्तर के 9 जनप्रतिनिधि Z+ सुरक्षा घेरे में
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कुल 13 लोग Z+ सुरक्षा में
38 जनप्रतिनिधि और उनके परिवार को Z श्रेणी सुरक्षा
35 जनप्रतिनिधि Y+ सुरक्षा घेरे में
121 जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों को X श्रेणी सुरक्षा
सुरक्षा श्रेणियों में तैनाती
Z+ सुरक्षा: लगभग 55 सुरक्षाकर्मी
Z सुरक्षा: लगभग 22 सुरक्षाकर्मी
Y+ सुरक्षा: 11 सुरक्षाकर्मी
X सुरक्षा: 2 सशस्त्र पुलिसकर्मी

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बस्तर में कई जनप्रतिनिधि भारी सुरक्षा घेरे में रहते हैं। ऐसे में जब तक इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को कम नहीं किया जाएगा, तब तक यह कहना मुश्किल होगा कि माओवाद पूरी तरह खत्म हो गया है।


विपक्ष का तर्क है कि अगर खतरा वास्तव में समाप्त हो गया है तो सरकार को चरणबद्ध तरीके से इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को हटाना चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि हालात सामान्य हो चुके हैं।


हालांकि भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा है कि नक्सलवाद के खिलाफ सबसे ज्यादा कार्रवाई वर्तमान सरकार के समय में हुई है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को माओवाद के खात्मे पर सवाल उठाने के बजाय इसे ऐतिहासिक उपलब्धि मानते हुए जश्न मनाना चाहिए।


भाजपा का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था खतरे के आकलन के आधार पर तय होती है और इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक माओवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अब अंतिम चरण में है और आने वाले समय में स्थिति पूरी तरह सामान्य होती नजर आएगी।


राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बात साफ है कि 31 मार्च को माओवाद के खात्मे की औपचारिक घोषणा से पहले ही इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस घोषणा के बाद सुरक्षा व्यवस्था और माओवादी प्रभावित इलाकों में हालात को लेकर क्या अगला कदम उठाती है।

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