रायपुर। जगजीत सिंह
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहा सुरक्षा बलों का अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। पिछले दो वर्षों में 2700 से अधिक नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है, जबकि बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए और गिरफ्तार भी हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार अगले दो दिनों में कई और नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना जताई जा रही है। सरकार ने पहले ही 31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य घोषित किया था और अब उस समयसीमा के केवल दो दिन बाकी हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार चल रहे ऑपरेशन, जंगलों में बढ़ती सुरक्षा मौजूदगी और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं। बस्तर के कई जिलों में सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, हालांकि कुछ अभी भी अंदरूनी इलाकों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
नक्सल अभियान के प्रमुख आंकड़े
बस्तर में चलाए जा रहे एंटी-नक्सल अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है।
532 नक्सली मारे गए
2704 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
2004 नक्सली गिरफ्तार किए गए
कई आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद
बस्तर के अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए
इन अभियानों के कारण नक्सलियों के नेटवर्क और उनकी गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए सुरक्षा और पुनर्वास
सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए सुरक्षा और पुनर्वास की विशेष व्यवस्था की है। उन्हें पुलिस लाइन, अस्थायी सुरक्षा कैंप और जिला पुनर्वास केंद्रों में सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसके साथ ही सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए कई सुविधाएं दी जा रही हैं।
सरकार दे रही ये सुविधाएं
आर्थिक सहायता और ऋण की व्यवस्था
आत्मसमर्पित नक्सलियों और उनके बच्चों की शिक्षा
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का लाभ
अविवाहित आत्मसमर्पित नक्सलियों को 1 लाख रुपये तक की अनुदान राशि
कौशल विकास और रोजगार के अवसर
सरकार का कहना है कि जो नक्सली हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं, उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए हर संभव सहायता दी जाएगी।
निर्णायक दौर में बस्तर
लगातार चल रहे ऑपरेशन, नए सुरक्षा कैंप और विकास कार्यों के कारण बस्तर में नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिमटता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले 2 दिनों में और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण हो सकता है, जिससे बस्तर में शांति और विकास का रास्ता और मजबूत होगा।
