रायपुर | 29 मार्च
छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के शिकार को लेकर वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर अब सवाल उठने लगे हैं। विभाग के एंटी पोचिंग डेटाबेस के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश में सिर्फ दो हिरणों के शिकार की घटनाएं दर्ज की गई हैं। जबकि जमीनी स्तर पर आए दिन शिकार और वन्यजीवों के अवैध कारोबार की खबरें सामने आती रहती हैं।
हाल ही में बिलासपुर जिले के एक सरकारी रिसॉर्ट में हिरण का मांस पकाए जाने का मामला सुर्खियों में रहा, जिससे विभागीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
2025 में शिकार और तस्करी की 23 घटनाएं दर्ज
वन विभाग के एंटी पोचिंग डेटाबेस के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 23 शिकार और अवैध तस्करी की घटनाएं दर्ज की गईं।
इनमें—
हिरण – 2
जंगली सूअर – 4
तेंदुआ – 5
बाघ – 1
पैंगोलिन – 3
भालू – 3
कछुआ – 1
बाइसन – 2
नीलगाय – 1
नेवला – 1
2024 में सिर्फ 13 मामले
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2024 में शिकार और तस्करी की सिर्फ 13 घटनाएं दर्ज की गईं।
इनमें—
हिरण – 2
जंगली सूअर – 3
तेंदुआ – 5
बाघ – 1
कछुआ – 1
मैना – 1
राष्ट्रीय डेटाबेस में नहीं डाला गया डेटा
दिल्ली स्थित वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) देशभर में वन्यजीव अपराधों का केंद्रीय डेटाबेस संचालित करता है, जिसमें सभी राज्यों के वन मंडलों को शिकार और तस्करी की जानकारी अपलोड करनी होती है।
लेकिन छत्तीसगढ़ वन विभाग ने लिखित जवाब में बताया है कि 2024 में किसी भी वन मंडल ने WCCB डेटाबेस में डेटा अपलोड नहीं किया।
वहीं 2025 की जानकारी मांगने पर विभाग ने कहा कि WCCB की वेबसाइट काम नहीं कर रही है, इसलिए डेटा अपलोड नहीं किया जा सका।
“आंकड़ों का अधूरा संधारण गंभीर विषय”
रायपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी का आरोप है कि प्रदेश में लगातार वन्यजीवों का शिकार हो रहा है, लेकिन विभागीय विफलताओं को छिपाने के लिए वास्तविक आंकड़ों का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा।
उनका कहना है कि यदि सभी घटनाओं को नियमित रूप से दर्ज किया जाए तो शिकार की वास्तविक संख्या कहीं अधिक सामने आएगी, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
सिंघवी के मुताबिक अधूरे आंकड़ों के कारण उच्च अधिकारी यह मान लेते हैं कि शिकार की घटनाएं कम हो रही हैं, जिससे रोकथाम के लिए कड़े कदम नहीं उठाए जाते।
उन्होंने मांग की है कि वन विभाग शिकार से संबंधित वास्तविक आंकड़े पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करे, ताकि वन्यजीव संरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो सके।
