रायपुर, 11 अक्टूबर 2025।
नया रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी की प्रसिद्ध मादा बाघिन ‘बिजली’ का 10 अक्टूबर की सुबह निधन हो गया। मात्र आठ वर्ष की आयु में उसने गुजरात के ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC), जामनगर में अंतिम सांस ली।
पिछले कुछ महीनों से वह गंभीर किडनी और बच्चेदानी की बीमारी से जूझ रही थी।
वन मंत्री केदार कश्यप ने बाघिन बिजली के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा —
“‘बिजली’ केवल एक बाघिन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की वन्य संपदा की पहचान थी। उसकी जीवंत उपस्थिति ने नंदनवन में आने वाले हर आगंतुक को प्रभावित किया। उसकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।”
मंत्री कश्यप ने बताया कि वन विभाग और विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बिजली के उपचार में पूरी निष्ठा से प्रयास किया, लेकिन प्रकृति के आगे सभी कोशिशें असफल रहीं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बिजली के शावकों की विशेष निगरानी की जाए और उनकी देखभाल में किसी प्रकार की कमी न रहे।
मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि उसकी हालत बिगड़ने पर 7 अक्टूबर को उसे विशेष ट्रेन से गुजरात स्थानांतरित किया गया था। जांच में पाया गया कि ब्लड यूरिया नाइट्रोजन, क्रिएटिनिन और पोटेशियम का स्तर अत्यधिक बढ़ गया था।
चिकित्सकों की टीम ने उसे गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखकर लगातार उपचार किया, लेकिन 10 अक्टूबर की सुबह 2:30 बजे उसने अंतिम सांस ली।
उल्लेखनीय है कि ‘बिजली’ का जन्म 2017 में नंदनवन में ही हुआ था।
अपने आकर्षक रूप, तेजस्वी स्वभाव और सक्रियता के कारण वह पर्यटकों की प्रिय रही। 2023 में उसने चार शावकों को जन्म दिया था — जिनमें तीन नर और एक मादा शामिल हैं।
