दंतेवाड़ा के नज़दीकी सीमाई इलाके से महत्त्वपूर्ण खबर है कि माओवादियों की रैंकों में एक बड़ा दरार दिखाई दे रही है। पुलिसिया सूत्रों के अनुसार संगठन के सी-सी (पॉलिट-ब्यूरो/सीनियर केडर) सदस्य सोनू दादा उर्फ़ भूपति ने गढ़चिरौली के सामने सरकार के समक्ष हथियार सहित आत्मसमर्पण किया है। उनके साथ लगभग 60 और नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण करने की सूचना मिली है और बताया जा रहा है कि इन साथियों ने लगभग 50 हथियार भी पुलिस के हवाले किए। मामले की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पुलिस व प्रशासन की ओर से अभी जारी नहीं की गई है; फिलहाल यह जानकारी स्थानीय पुलिस सूत्रों पर आधारित है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोनू दादा के बयान के बाद संगठन में आपसी मतभेद स्पष्ट रूप से देखे गए और इससे बड़ी संख्या में नक्सली अलग-अलग समूहों के साथ अथवा समवेत रूप से बाहर निकल कर आत्मसमर्पण करने के लिए आगे आए। आत्मसमर्पण करने वाले रिश्तेदारों और साथियों से पूछताछ जारी है ताकि संगठन के नेटवर्क, हथियारों के स्रोत और घटनाओं की विस्तृत जानकारी मिल सके। पुलिस का कहना है कि पूछताछ से मिलने वाली खुफिया जानकारियाँ भविष्य की कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण सहायक होंगी।
दंतेवाड़ा और गढ़चिरौली की सीमाएँ लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिए संवेदी क्षेत्र रही हैं। हाल के महीनों में दोनों पक्षों—राज्य पुलिस और नक्सल संगठन—में कई हलचलें देखी गई हैं: कुछ वरिष्ठ माओवादी नेताओं के द्वारा शांति या हथियार छोड़ने के संकेत-मूलक बयान और कुछ स्थानों पर बड़े स्तर पर आत्मसमर्पण भी हुए हैं। उदाहरण के लिए, राज्य में हाल ही में कुछ वरिष्ठ मंचों/डिवीजनों ने संघर्ष की रणनीति पर सवाल उठाए जाने की खबरें आई हैं और गढ़चिरौली में छुट्टे-छुट्टे मामलों में सीनियर केडर्स के आत्मसमर्पण की रिपोर्टें भी रह चुकी हैं।
आत्मसमर्पण का स्थानीय और नीतिगत अर्थ: यदि यह खबर आधिकारिक रूप से सत्यापित हो जाती है तो यह माओवादी संरचना के लिए बड़ा झटका माना जाएगा — खासकर तब जब आत्मसमर्पण करने वाले में कोई उच्च रैंक का नेता हो। ऐसे आत्मसमर्पण न केवल क्षेत्रीय हथियार-संग्रह में कमी का संकेत देते हैं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानव-इंटेल (सूचना) का स्रोत भी बनते हैं, जिससे बाकी नेटवर्क को भेदना और योजनाएँ उजागर करना संभव होता है। साथ ही, राज्य की स्सरेंडर-रीहैबिलिटेशन नीतियाँ इन लोगों को समाज में लौटने के लिये एक वैकल्पिक रास्ता देती हैं — हालाँकि वास्तविक पुनर्वास और सत्यापन प्रक्रियाएँ जटिल होती हैं।
पुलिस की कार्रवाई व जांच की दिशा: पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और सी-60/स्थानीय कमान की टीमें आत्मसमर्पणकर्ताओं से पूछताछ कर रही हैं। पूछताछ में नक्सलियों के बीच हथियारों के स्रोत, ठिकाने, पूर्व योजनाएँ और किन-किन गतिविधियों में वे शामिल थे—इन सबका ब्यौरा निकलने की सम्भावना है। पुलिस फिलहाल आत्मसमर्पणकर्ताओं को रिमांड/कस्टडी में रखकर आवश्यक कानूनी और सुरक्षात्मक प्रक्रियाएँ पूरी कर रही है; साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि किसे किस स्तर की कानूनी कार्रवाई या रिहैबिलिटेशन की पेशकश की जाएगी।
