रायपुर। डीएसपी कल्पना वर्मा पर लगाए गए चारित्रिक आरोपों का सच सामने आ गया है। जांच में मिले दस्तावेज़ों और संबंधित रिकॉर्ड ने यह साफ कर दिया है कि पूरा विवाद किसी कथित संबंध या निजी आचरण से नहीं, बल्कि चेक बाउंस के पुराने व्यावसायिक मामले की रंजिश से उपजा है। आरोप लगाने वाले दीपक टंडन और उसकी पत्नी खुद न्यायालय में लंबित केस की प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद — रेस्टोरेंट डील से कोर्ट तक पहुंचा मामला
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024 में डीएसपी कल्पना वर्मा के पिता ने अपने पुत्र के लिए एक रेस्टोरेंट की व्यावसायिक डील दीपक टंडन के माध्यम से की थी। बाद में रेस्टोरेंट का विक्रय कर दिया गया, लेकिन विवादित पक्ष द्वारा एक निर्धारित राशि का भुगतान लंबित रह गया।
बकाया रकम के एवज में दीपक टंडन ने अपनी पत्नी के नाम से सुरक्षा चेक प्रदान किया। बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक बाउंस हो गया, जिसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत के आदेश पर दीपक टंडन की पत्नी को नियमित रूप से पेश होना पड़ रहा है।
रंजिश में उछाला गया DSP कल्पना वर्मा का नाम
न्यायिक दबाव बढ़ने के बाद इस मामले को मोड़ देकर मीडिया में भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की गईं। इस विवाद का सीधा संबंध कल्पना वर्मा से नहीं था, लेकिन जानबूझकर उनका नाम उछालकर चारित्रिक बदनाम करने का प्रयास किया गया।
DSP कल्पना वर्मा का आधिकारिक बयान
डीएसपी कल्पना वर्मा ने स्पष्ट कहा —
“यह पूरा विवाद एक वित्तीय लेन–देन से संबंधित है जो मेरे पिता और दीपक टंडन के बीच हुआ था। चेक बाउंस का मामला न्यायालय में है। इसके बावजूद भ्रामक सूचनाओं के जरिए मेरा नाम घसीटकर मेरी छवि खराब की जा रही है, जबकि इस लेन–देन में मेरा प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।”
दस्तावेज़ों से क्या उजागर हुआ – जांच में मिले दस्तावेज़ों के अनुसार —
- चेक बाउंस केस 2024 से अदालत में लंबित
- आरोपी पक्ष की पत्नी पर अदालत में नियमित पेशी की बाध्यता
- आर्थिक रंजिश को मीडिया में चरित्र हनन का मोड़ देने की कोशिश
- कल्पना वर्मा के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत या आधिकारिक शिकायत नहीं
