रायपुर/बीजापुर/सुकमा।
बस्तर संभाग में गणतंत्र दिवस ने इस बार इतिहास रच दिया। जिन इलाकों में दशकों तक नक्सलियों का डर और फरमान चलते रहे, वहां आज़ादी के बाद पहली बार तिरंगा शान से लहराया। बस्तर के 47 गांवों में पहली बार ध्वजारोहण हुआ, जिसने लोकतंत्र की बड़ी जीत और सुरक्षा बलों की मजबूती को साबित कर दिया।
बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों पर ताड़पाला कैंप में सीआरपीएफ की 196वीं बटालियन और कोबरा की 204वीं बटालियन के जवानों ने पहली बार राष्ट्रध्वज फहराया। खास बात यह रही कि एक दिन पहले ही इसी इलाके में आईईडी ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 10 जवान घायल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद जवानों का हौसला नहीं टूटा और उन्होंने नक्सलियों के किले पर तिरंगा लहराकर देशभक्ति का संदेश दिया।
सुकमा जिले के गोगुंडा गांव में भी ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस धरती पर कभी माओवादियों के काले झंडे फहराते थे, वहां अब तिरंगे के साथ राष्ट्रगान गूंजा। सीआरपीएफ 74वीं वाहिनी के कमांडेंट हिमांशु पांडे के नेतृत्व में यह पल संभव हुआ, जो दशकों से हिंसा के साये में जी रहे ग्रामीणों के लिए उम्मीद की नई सुबह बनकर आया।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस मौके पर कहा कि जवानों की भुजाओं की ताकत से इस साल बस्तर के 47 नए गांवों में आज़ादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प से यह संभव हुआ है और आने वाले समय में बस्तर के हर गांव के कोने-कोने तक तिरंगा लहराएगा।
दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर में यह गणतंत्र दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि माओवादी फरमानों पर लोकतंत्र की निर्णायक जीत के रूप में दर्ज हो गया है।
