रायपुर। विधानसभा में बोर्ड परीक्षाओं के बीच शिक्षकों की SIR (विशेष पुनरीक्षण/सर्वे) कार्य में ड्यूटी लगाए जाने का मुद्दा गरमा गया। विधायक संगीता सिन्हा ने इस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए सरकार से जवाब मांगा।
संगीता सिन्हा ने कहा कि प्रदेश में लगभग 18,198 शिक्षकों की ड्यूटी SIR कार्य में लगाई गई है, जबकि फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में शिक्षकों को स्कूल से बाहर की जिम्मेदारी देना छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका नहीं, बल्कि प्रदेशभर के शिक्षकों का सामूहिक आग्रह था कि परीक्षा अवधि में उन्हें अतिरिक्त ड्यूटी से मुक्त रखा जाए।
विधायक ने सवाल उठाया कि यदि परिणाम प्रभावित होते हैं तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार खराब रिजल्ट की जवाबदेही तय करेगी?
इस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि SIR कार्य भारत निर्वाचन आयोग से जुड़ा है और इसमें सभी विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। शिक्षा विभाग के करीब 18 हजार शिक्षक भी इसमें शामिल हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को पहले स्कूल में अध्यापन कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, उसके बाद ही SIR का काम करना है। जिन स्कूलों में पढ़ाई कमजोर होने की जानकारी मिली है, वहां जिला अधिकारियों को मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर अस्थायी रूप से अन्य शिक्षकों की ड्यूटी लगाकर कोर्स पूरा कराया जाएगा।
मामले को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है, जबकि अभिभावकों और छात्रों की नजर अब परीक्षा परिणामों पर टिकी है।
