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विधानसभा में गूंजा नशे का मुद्दा, सरकार के दावों पर विपक्ष का तीखा सवाल


रायपुर / प्रदेश में तेजी से फैल रहे नशे के कारोबार को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सदन में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आए।


अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में नशा माफियाओं का जाल लगातार फैल रहा है और हालात पहले से अधिक चिंताजनक हो गए हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि गांजा और नशीली सिरप के मामले खासकर बलरामपुर और बस्तर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल गिरफ्तारी और जब्ती के आंकड़े पेश करना काफी नहीं, बल्कि समाज स्तर पर जागरूकता और रोकथाम के लिए ठोस पहल जरूरी है।


सरकार का जवाब: आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि सरकार अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के कारोबारियों की आर्थिक जड़ें काटने की दिशा में काम कर रही है।


उन्होंने बताया कि बिलासपुर समेत कई जिलों में कार्रवाई करते हुए 16 मामलों में करोड़ों की संपत्ति अटैच की गई है। एंटी नार्को टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसमें 100 पद स्वीकृत हैं और सभी जिलों में विशेष टीमें सक्रिय हैं।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
2022 में 8,911 किलो नशीला पदार्थ नष्ट
2023 में 8,900 किलो गांजा नष्ट
2024 में 24,000 किलो गांजा नष्ट
2025 में 64,000 किलो नशीला पदार्थ नष्ट
सरकार का दावा है कि विष्णु देव साय सरकार में पहली बार NDPS के साथ SAFEMA कोर्ट तक कार्रवाई की जा रही है।


बच्चों और युवाओं पर असर का मुद्दा
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि नशे का सीधा असर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। स्कूलों में छात्र इसकी चपेट में आ रहे हैं, जो प्रदेश के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।


उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर स्पष्ट नजर नहीं आ रहा।


गृह मंत्री ने जवाब में कहा कि नशा केवल पुलिस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती है। रायपुर, सरगुजा और राजनांदगांव समेत कई जिलों में संयुक्त अभियान और समन्वय बैठकों के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है।


सदन की बहस से साफ है कि सरकार आंकड़ों के जरिए अपनी सख्ती दिखा रही है, जबकि विधायक जमीनी बदलाव और जनजागरूकता की मांग कर रहे हैं। अब सवाल यही है कि क्या ये सख्त कार्रवाई प्रदेश में फैलते नशे के जाल को सचमुच तोड़ पाएगी?

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