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धर्मांतरण पर विधानसभा में तीखा संग्राम, ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’ सर्वसम्मति से पारित

रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार का दिन धर्मांतरण के मुद्दे पर बेहद गरम रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक तकरार के बीच अंततः धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। विधेयक के पारित होते ही सदन का माहौल पूरी तरह बदल गया और जय श्री राम के नारों से विधानसभा गूंज उठी।


इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष, खासकर कांग्रेस के बहिर्गमन ने बहस को और राजनीतिक रंग दे दिया। सत्ता पक्ष ने इसे मुद्दे से पलायन बताया, जबकि विपक्ष ने अपनी असहमति को दर्ज कराने का यह तरीका बताया।


गृहमंत्री विजय शर्मा का बड़ा हमला—“आंकड़ों में सच्चाई दबाई गई”
उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कई अहम और विवादित बिंदु उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में 1968 का धर्मांतरण कानून लागू है, जिसे कांग्रेस सरकार के समय बनाया गया था, लेकिन समय के साथ उसकी प्रभावशीलता कम हो गई है।


उन्होंने विधानसभा में आंकड़े रखते हुए कहा कि
2004 से 2021 तक कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बीजापुर जिलों में धर्मांतरण की एक भी आधिकारिक सूचना प्रशासन को नहीं दी गई


जबकि जमीनी स्तर पर लगातार शिकायतें और विवाद सामने आते रहे
शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या सरकारी रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति को छुपाया गया है या लोग जानबूझकर कानून के प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे।


दंतेवाड़ा और बस्तर का जिक्र—“जमीनी हकीकत अलग”
गृहमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले में कुछ मामलों की सूचना दर्ज है, लेकिन बस्तर संभाग के कई हिस्सों में स्थिति कहीं अधिक गंभीर बताई जा रही है।
उन्होंने कहा कि
गांव-गांव में सामाजिक तनाव बढ़ रहा है
कई जगहों पर अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी विवाद हो रहे हैं
दो-दो महीनों तक शवों के अंतिम संस्कार में देरी जैसी घटनाएं सामने आई हैं
उन्होंने इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक बताया।


“माओवाद नहीं कर पाया, धर्मांतरण कर रहा”—बड़ा बयान
गृहमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि
माओवादी भी बस्तर में वह वर्ग संघर्ष नहीं खड़ा कर पाए, जो आज धर्मांतरण की वजह से देखने को मिल रहा है।


उन्होंने इसे एक नई और गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि
यह केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता से जुड़ा विषय है
इसे समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है
आदिवासी समाज और संस्कृति पर खतरे की बात
सरकार ने बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासी इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि
धर्मांतरण से पारंपरिक संस्कृति प्रभावित हो रही है
परिवारों में विभाजन और समाज में दरार बढ़ रही है
सांस्कृतिक पहचान कमजोर होने का खतरा है
गृहमंत्री ने कहा कि सरकार आदिवासी संस्कृति को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शेगी नहीं।
कांग्रेस पर सीधा हमला—“चर्चा से भागी विपक्ष”
सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। गृहमंत्री ने कहा कि
कांग्रेस ने इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बचने के लिए बहिर्गमन किया
वोट बैंक की राजनीति के कारण वह स्पष्ट रुख नहीं अपना रही
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1968 का कानून खुद कांग्रेस की सरकार लाई थी, लेकिन आज उसी विषय पर चर्चा से दूरी बनाई जा रही है।


ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ भी आए सामने
बहस के दौरान कई ऐतिहासिक मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। बाबरी मस्जिद प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा गया कि उस समय भाजपा की सरकारें बर्खास्त कर दी गई थीं। साथ ही देश विभाजन और घुसपैठ जैसे विषयों को भी चर्चा में जोड़ा गया, जिससे बहस और ज्यादा राजनीतिक हो गई।


सरकार का पक्ष—“किसी धर्म के खिलाफ नहीं, व्यवस्था के पक्ष में”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी एक धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं है।
सरकार के अनुसार इस विधेयक का उद्देश्य है
प्रलोभन, दबाव या भ्रम के आधार पर होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना
धर्मांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और नियंत्रित बनाना
समाज में शांति और संतुलन बनाए रखना
क्यों अहम है यह नया कानून
नए विधेयक में संभावित रूप से
धर्मांतरण की पूर्व सूचना अनिवार्य करने
प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
जैसे प्रावधानों पर जोर दिया गया है।


सदन का माहौल—नारे और संदेश
विधेयक पारित होने के बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए। सरकार ने इसे सामाजिक समरसता और कानून व्यवस्था के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि विपक्ष की अनुपस्थिति ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

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