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छातिम-कोनोकॉरपस पर विधानसभा में तीखी बहस, सरकार बोली– रिसर्च के बाद ही लगेगी रोक


रायपुर विधानसभा ब्रेक | प्रश्न क्रमांक-2
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में छातिम और कोनोकॉरपस पेड़ों को लेकर आज जमकर सियासी तकरार देखने को मिली। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने प्रश्नकाल में इन पेड़ों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।।


सुनील सोनी ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी से पूछा कि जब देश के कई राज्यों में छातिम वृक्ष के दुष्प्रभावों को देखते हुए इसके रोपण पर रोक लगाई जा चुकी है, तो छत्तीसगढ़ में अब तक ऐसा निर्णय क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि छातिम पेड़ों से लोगों में एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, ऐसे में सरकार की क्या ठोस कार्ययोजना है।


जवाब में मंत्री ओपी चौधरी ने साफ किया कि फिलहाल वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा छातिम वृक्ष पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पेड़ से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव के प्रमाण मिलते हैं, तो सरकार गंभीरता से संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी। अभी तक इस संबंध में कोई ठोस वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है, हालांकि अन्य राज्यों से कुछ रिपोर्ट्स जरूर सामने आई हैं।


मंत्री ने संकेत दिए कि भविष्य में नए छातिम वृक्षों का रोपण नहीं किया जाएगा और पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों, जैसे पीपल, को बढ़ावा दिया जाएगा। फिलहाल मौजूदा छातिम पेड़ों को हटाने या उनके स्थान पर अन्य वृक्ष लगाने की कोई योजना नहीं है।


वहीं, सुनील सोनी ने कोनोकॉरपस पेड़ को भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए उसे हटाने की मांग की। इस पर मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक रिसर्च और तकनीकी अध्ययन के आधार पर ही किसी पेड़ पर रोक लगाने का निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए तकनीकी टीम गठित कर भविष्य में ठोस कदम उठाए जाएंगे।


सदन में इस मुद्दे पर हुई तीखी बहस ने साफ कर दिया कि छत्तीसगढ़ में पेड़ों के चयन और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बनता जा रहा है।

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