रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में पिछले चार वर्षों के दौरान 285 कैदियों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए National Human Rights Commission (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मुख्य सचिव और महानिदेशक जेल से इस मामले में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी के मुताबिक, मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ-मोटो) लिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की विभिन्न जेलों में पिछले चार सालों के दौरान 285 कैदियों की कथित मौत हुई है, जिसे आयोग ने गंभीर मानवाधिकार मुद्दा माना है।
राज्य सरकार ने विधानसभा में दी गई जानकारी में इन मौतों की वजह आत्महत्या और पुरानी बीमारियां बताई थी। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों को लेकर आयोग ने चिंता जताई है और पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच और जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाया है।
एनएचआरसी ने अपनी नोटिस में राज्य सरकार से जेलों की स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें विशेष रूप से जेलों की क्षमता और वास्तविक बंदियों की संख्या, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खाली पद, कैदियों को उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं तथा मौतों को रोकने के लिए उठाए गए सुधारात्मक कदम शामिल हैं।
आयोग ने यह भी कहा है कि रिपोर्ट में मौतों के कारण, जांच की स्थिति और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बनाई गई कार्ययोजना का स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में जेलों में भीड़भाड़, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी या लापरवाही सामने आती है तो राज्य सरकार को जेल व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए ठोस कदम उठाने पड़ सकते हैं।
