रायपुर।
छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 562 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है। इनमें 9 बाघों की मौत भी शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है कि 102 वन्यजीवों की जान शिकारियों ने ली, जिससे अवैध शिकार की समस्या भी सामने आई है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बलरामपुर, सूरजपुर, धमतरी, रायगढ़ और कोरबा जिलों में हाथियों की सबसे अधिक मौतें दर्ज हुई हैं। वहीं सारंगढ़, कोरिया, अचानकमार और जंगल सफारी क्षेत्र में बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं।
साल 2025 में अवैध शिकार के 58 मामले दर्ज किए गए, जो यह संकेत देते हैं कि वन्यजीवों के खिलाफ अपराध अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
हर साल बढ़ता गया मौत का आंकड़ा
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में सबसे ज्यादा 314 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई। वहीं जनवरी 2026 में ही 27 वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। इससे साफ है कि पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों पर खतरा तेजी से बढ़ा है।
सड़क हादसे, बीमारी और करंट भी बने कारण
वर्ष 2023 में 1 से 31 दिसंबर के बीच 16 वन्यजीवों की मौत दर्ज हुई थी। इनमें लकड़बग्घा, जंगली सूअर, चीतल, तेंदुआ, नीलगाय, काला हिरण और चौसिंगा शामिल थे।
इनमें से 8 वन्यजीवों की मौत अज्ञात वाहनों की टक्कर से, 1 की आवारा कुत्तों के हमले से, जबकि अन्य की मौत बीमारी, अवैध शिकार और करंट लगने से हुई थी।
लगातार बढ़ती इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में निगरानी बढ़ाने और अवैध शिकार पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है, ताकि राज्य की जैव विविधता को बचाया जा सके।
